पाक ने अपने राजदूतों का सम्मेलन बुलाया

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Image caption पाकिस्तान में नेटो सेना के हमले के ख़िलाफ़ काफ़ी ग़ुस्सा है और सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है.

पाकिस्तानी सरकार ने नैटो के हमले के बाद उपजे संकट को देखते हुए विदेश नीति पर विचार विर्मश के लिए अपने राजदूतों का सम्मेलन बुलाया है.

यह सम्मेलन 26 नवंबर को नैटो के हैलिकॉप्टरों की ओर से पाकिस्तानी चौकियों पर हुए हमले के बाद बुलाई गई है.

उस हमले में दो अफ़सरों सहित 24 सैनिक मारे गए थे.पाकिस्तानी सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया था और नैटो के साथ सहयोग की नीति पर पुअपनेनर्विचार करने का फ़ैसला लिया था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने पत्रकारों को बताया कि यह सम्मेलन अगले सप्ताह 12 और 13 दिसंबर को होगा जिसमें विभिन्न देशों में मौजूद पाकिस्तानी राजदूत और उच्चायुक्त भाग लेंगे.

उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य पाकिस्तान की विदेश नीति पर विस्तार से चर्चा करना है.

अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों पर बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "अमरीका के साथ पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंध हैं.26 नवंबर की घटना के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल, संसद की सुरक्षा समिति और मंत्रिमंडल की रक्षा समिति के निर्देशों पर संबंधों पर पुनर्विचार किया जा रहा है."

'अफ़ग़ानिस्तान में शांति ज़रुरी'

अब्दुल बासित के मुताबिक़ पाकिस्तानी सरकार ने राष्ट्रीय हित में अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर हुए सम्मेलन में भाग न लेने का फ़ैला लिया. उन्होंने कहा कि इसका यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे से अलग हो गया है.

जब उनसे पूछा गया कि नैटो के महासचिव ने पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों को हल करने के लिए एक राजनीतिक प्रक्रिया की घोषणा की है, तो उन्होंने कहा कि यह एक प्रस्ताव है जिस पर उस समय बात हुई थी जब पिछले साल नैटो के महासचिव पाकिस्तान आए थे.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से मुहर्रम के दौरान के अफ़ग़ानिस्तान में हुए बम धमाकों पर हामिद करज़ई के बयान पर भी सवाल पूछा गया. इस पर पअब्दुल बासित ने कहा कि पाकिस्तान बम धमाकों की कड़े शब्दों में निंदा कर चुका है और कह चुका है कि आतंकवाद दोनों देशों की बड़ी समस्या है जिसे मिल कर ख़त्म करने की ज़रुरत है.

उन्होंने कहा, “हमने एक प्रतिबंधित संगठन के बारे में राष्ट्रपति करज़ई का बयान देखा है और हम काबुल से कहते हैं कि वह सरकारी स्तर पर इस बारे में सभी सबूत पेश करे.”

ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने बम धमाकों की ज़िम्मेदारी पाकिस्तानी चरमपंथी संगठव लश्करे झंगवी की ओर से लिए जाने के बाद कहा था कि वह पाकिस्तानी सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे.

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