बीमार ज़रदारी ने कहा मैं 'ठीक' हूं

  • 9 दिसंबर 2011
पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption ज़रदारी के दुबई जाने के बाद से ही अफ़वाहें उड़ रही हैं कि वे इस्तीफ़ा देंगे.

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक़ राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि वे 'ठीक' हैं और जल्द ही घर लौटेंगे.

निजी टीवी चैनल जियो में काम करने वाले हामिद मीर ने कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति से फ़ोन पर बात की है. हामिद ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि ज़रदारी "ठीक तरह से बात कर रहे थे" और उन्हें "सब बातों की जानकारी" थी.

दिल का इलाज कराने के लिए दुबई जाने के बाद ये पहला मौका है जब राष्ट्रपति ने मीडिया से बात की है.

उनके दुबई जाते ही अफ़वाहों का बाज़ार ग़र्म हो गया था कि राष्ट्रपति शायद इस्तीफ़ा दे दें, हालांकि अधिकारियों ने इस बात से इंकार किया था.

माना जा रहा है कि टेलीफ़ोन पर इस कथित बातचीत का लक्ष्य आसिफ़ अली ज़रदारी की सेहत के बारे में चल रही उन अटकलबाज़ियों और अफ़वाहों को ख़त्म करना था जो उनके प्रवक्ता के कई बयानों के बाद भी ख़त्म नहीं हो रहे थीं.

'मेरे दुश्मन निराश होंगे'

अभी ये साफ़ नहीं है कि दुबई में ज़रदारी के इलाज में कितना समय लगेगा.

हामिद मीर के मुताबिक़ आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा, "मैं पाकिस्तान नहीं छोड़ना चाहता था. लेकिन मेरे बच्चों, दोस्तों और प्रधानमंत्री ने ज़ोर डाला कि मैं चेक-अप के लिए जाऊं."

राष्ट्रपति ने ये भी कहा, "जो लोग देश छोड़ कर भागते हैं, वो अपने बच्चों को साथ लेकर भागते हैं.......मेरे दुश्मन ज़रूर निराश होंगे."

ज़रदारी के प्रवक्ता ने कहा है कि दुबई के एक अस्पताल में उनका चेक-अप पहले से तय थे. बुधवार को फ़रहतुल्लाह बाबर ने कहा कि ज़रदारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया है और अब तक की गई जांच में सब कुछ सामान्य है.

आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तानी राजनीति की एक विवादित हस्ती हैं. 2008 में उनकी पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चुनाव जीतने के बाद वे सत्ता में आए.

वर्ष 2007 तक पार्टी की कमान उनकी पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के हाथ में थी. बेनज़ीर की 2007 में हत्या हुई थी.

मुश्किल वर्ष

हाल के हफ़्तों में एक लीक हुए मेमो मामले के चलते पाकिस्तान की असैनिक सरकार पर काफ़ी दबाव रहा है. इस मेमो में पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित रूप से अमरीका से संभावित सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ मदद मांगी थी.

मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

ये साल पाकिस्तान के लिए मुश्किलों से भरा रहा है. मई में अमरीकी छापे में अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद से उसके और अमरीका के रिश्तों में काफ़ी खटास आई है.

तब से कई वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों ने पाकिस्तान पर उन चरमपंथी गुटों को समर्थन देने का आरोप लगाया है जो अफ़ग़ानिस्तान से लगी उसकी सीमा से पश्चिमी और अफ़ग़ानी सेनाओं पर हमला करते हैं.

लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा ही इन आरोपों से इंकार किया है.

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