'पाकिस्तान और तालिबान में शांति की बातचीत'

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Image caption अमरीका के तालिबानी चरमपंथियों के साथ इस वार्तालाप का समर्थन करने की संभावना नहीं है.

पाकिस्तानी तालिबान के उप-कमांडर मौलवी फ़कीर मोहम्मद ने कहा है कि उनका संगठन पाकिस्तानी सरकार के साथ शांति वार्ताएं कर रहा है.

उन्होंने कहा कि शुरू में ये वार्ताएं कबाइली इलाक़े बजौर पर केंद्रित रहेंगी और उसके बाद ही अन्य इलाक़ों के बारे में बातचीत की जाएगी.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने 145 तालिबानी कैदियों को रिहा कर अच्छा काम किया है और पाकिस्तानी तालिबान युद्ध विराम चाहते हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में मौलवी फकीर मोहम्मद ने कहा, ''अगर बातचीत कामयाब रही और हम बजौर में समझौते पर हस्ताक्षर कर पाए तो सरकार और स्वात, मोहमांद, ओरकज़ाई और दक्षिण वज़ीरीस्तान के तालिबान भी समझौते करेंगे. बाकी क्षेत्रों के लिए बजौर आदर्श की तरह होगा.''

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसफ रज़ा गिलानी ने शनिवार को एक पाकिस्तानी टीवी चैनल पर तालिबान से चल रही बातचीत की पुष्ठि की है.

सितंबर के अंत में पाकिस्तान ने अपने देश के चरमपंथियों से वार्ताएं कर 'शांति को एक मौका देने' की बात की थी.

अमरीका के तालिबानी चरमपंथियों के साथ इस वार्तालाप का समर्थन करने की संभावना नहीं है.

असफल समझौते

इससे पहले हुए सभी शांति समझौते ज़्यादा देर तक नहीं चल पाए थे जिसके चलते सरकार को शर्मिंदा होना पड़ा था. ये साफ नहीं है कि मौलवी फ़कीर मोहम्मद सारे संगठन के ओर से बात कर रहे हैं या नहीं.

ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान में सैकड़ों हमले करने वाले इस संगठन के पिछले एक साल में कई गुट बन चुके हैं.

मोहम्मद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के बजौर गुट के मुखिया हैं और ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों में उनका हाथ हो सकता है.

उन्हें अलकायदा के भी करीब माना जाता है.

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