ज़रदारी को कल मिलेगी अस्पताल से छुट्टी

आसिफ़ अली ज़रदारी
Image caption राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी पिछले एक हफ़्ते से दुबई की एक अस्पताल में भर्ती हैं जहाँ उनका इलाज चल रहा है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के डॉक्टरों ने कहा है कि उनका स्वास्थ्य अब ठीक है और गुरुवार को उन्हें छुट्टी मिलेगी.

राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी पिछले एक सप्ताह से दुबई की एक अस्पताल में भर्ती हैं, जहाँ उनके दिल का इलाज चल रहा है.

इस्लामाबाद स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता फ़रहतुल्लाह बाबर ने एक बयान जारी कर कहा, “राष्ट्रपति के मेडिकल टेस्ट ठीक आए हैं और डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें कल अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी.”

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ज़रदारी का स्वस्थ्य अब ठीक है और डॉक्टरों की सलाह पर वे कुछ समय के लिए दुबई में अपने घर में आराम करेंगे.

ग़ौरतलब है कि करीब एक हफ़्ता पहले उनके दुबई जाते ही अफ़वाहों का बाज़ार ग़र्म हो गया था कि वे शायद इस्तीफ़ा दे दें, हालांकि अधिकारियों ने इस बात से इंकार किया था.

कुछ दिन पहले उन्होंने एक पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर से टेलीफ़ोन पर बात की थी और कहा था कि वे ठीक हैं और जल्दी स्वदेश लौटेंगे.

हामिद मीर के मुताबिक़ आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा था, "मैं पाकिस्तान नहीं छोड़ना चाहता था. लेकिन मेरे बच्चों, दोस्तों और प्रधानमंत्री ने ज़ोर डाला कि मैं चेक-अप के लिए जाऊं."

'दश्मनों को निराशा'

राष्ट्रपति ने ये भी कहा था, "जो लोग देश छोड़ कर भागते हैं, वो अपने बच्चों को साथ लेकर भागते हैं.......मेरे दुश्मन ज़रूर निराश होंगे."

माना जा रहा है कि टेलीफ़ोन पर इस कथित बातचीत का लक्ष्य आसिफ़ अली ज़रदारी के स्वास्थ्य के बारे में चल रही उन अटकलबाज़ियों और अफ़वाहों को ख़त्म करना था, जो उनके प्रवक्ता के कई बयानों के बाद भी ख़त्म नहीं हो रहे थीं.

आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तानी राजनीति की एक विवादित हस्ती हैं. 2008 में उनकी पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चुनाव जीतने के बाद वे सत्ता में आए.

वर्ष 2007 तक पार्टी की कमान उनकी पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के हाथ में थी. बेनज़ीर की 2007 में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी.

'कथित ज्ञापन पर विवाद'

हाल के हफ़्तों में एक लीक हुए मेमो मामले के चलते पाकिस्तान की नागरिक सरकार पर काफ़ी दबाव रहा है. इस मेमो में पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित रूप से अमरीका से संभावित सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ मदद मांगी थी.

मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक़्क़ानी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

यह साल पाकिस्तान के लिए मुश्किलों से भरा रहा है. मई में अमरीकी छापे में अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद से उसके और अमरीका के रिश्तों में काफ़ी खटास आई है.

तब से कई वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों ने पाकिस्तान पर उन चरमपंथी गुटों को समर्थन देने का आरोप लगाया है जो अफ़ग़ानिस्तान से लगी उसकी सीमा से पश्चिमी और अफ़ग़ानी सेनाओं पर हमला करते हैं.

लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा ही इन आरोपों से इंकार किया है.

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