पाक सूचना मंत्री का इस्तीफ़ा नामंज़ूर

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Image caption केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़िरदौस आशिफ़ आवाण ने अपने पद से इस्तीफ़े की घोषणा की है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने सूचना मंत्री फ़िरदौस आशिफ़ आवाण का इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया है. गिलानी ने उनकी शिकायतों को दूर करने का यक़ीन दिलाया है.

गिलानी ने उनकी शिकायतों को दूर करने का यक़ीन दिलाया है.

इससे पहले पाकिस्तान में सेना और सरकार के बीच बढ़ते तनाव के चलते केंद्रीय सूचना मंत्री फ़िरदौस आशिफ़ आवाण ने रविवार को अपने पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की थी.

फ़िरदौस ने प्रधानमंत्री गिलानी और पार्टी के ज़रिए उन्हें नज़रअंदाज़ किए जाने का भी इलज़ाम लगाया.

उन्होंने यह घोषणा कराची में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में की जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी कर रहे थे.

जब उन्होंने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को अपना इस्तीफ़ा पेशा किया तो वह उस समय रो रही थी.

उन्होंने बैठक में बात करते हुए कहा, "मैं प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के नेतृत्व पर विश्वास करती हूँ और हमेशा करती रहूँगी. मुझे यह ऐलान करते हुए दुख हो रहा है कि मैं अपने पद से त्याग पत्र दे रही हूँ."

फ़िरदौस आशिक़ आवाण ने बताया कि अगर पीपुल्स पार्टी उनके काम से संतुष्ट नहीं है तो वह इस पद पर बनी नहीं रह सकती.

बताया जा रहा है कि मेमो विवाद के बाद उन्होंने बतौर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री सरकार का बचाव नहीं किया था लेकिन स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

मेमो विवाद की छाया

फ़िरदौस आशिक़ आवाण का संबंध पंजाब के ज़िले स्यालकोट से है और 2008 के आम चुनावों में पीपुल्स पार्टी की सीट पर संसद में पहुँची थी.

क़रीब एक साल पहले मंत्रिमंडल में फेर-बदल के बाद उन्हें सूचना मंत्री का पदभार दिया गया था.

ग़ौरतलब है कि कथित मेमो विवाद के बाद सरकार और सेना के बीच तनाव में बढ़ोत्तरी हो रही है और अचानक उनके इस्तीफ़े से कई अटकलें लगाई जा रही हैं.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तानी सरकार और सेना में बढ़ते तनाव के बीच सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ कियानी ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा था कि तख़्तापलट की ख़बरें गुमराह करने वाली है.

सेना की वेबासाइट पर जारी बयान के मुताबिक़, "सेना को अपनी संवैधानिक दायित्वों को पूरा बोध है. तख़्तापलट की बातें केवल अफ़वाहें हैं ताकि असल मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके.सेना सत्ता नहीं हड़पना चाहती."

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने तख़्तापलट की किसी आशंका से इनकार किया था.

मेमोगेट प्रकरण पर याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, "लोग निश्चिंत रहें. सेना के सत्ता पर काबिज़ होने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि अब लोगों को कोर्ट पर भरोसा है."

एक दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने संसद में आरोप लगाया था कि 'कुछ लोग' सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं.

उन्होंने किसी भी संस्था का नाम नहीं लिया था लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा सेना और आईएसआई की तरफ़ था.सुप्रीम कोर्ट में नौ जजों का पैनल इस याचिका पर विचार कर रहा है कि क्या मेमोगेट प्रकरण की जांच होनी चाहिए.पाकिस्तान में चार बार सेना का शासन रह चुका है.

मेमोगेट विवाद उस 'मेमो' या चिट्ठी से शुरु हुआ था जिसमें अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने अमरीकी सैन्य अधिकारियों को कथित रूप से गुप्त ज्ञापन भेजा था. इसमें अमरीका से पाकिस्तानी सेना की ताक़त को कम करने के लिए कहा गया था.

पाकिस्तान के नेता कथित तौर पर इस बात से चिंतित थे कि ऐबटाबाद में अमरीकी सुरक्षा बलों के ओसामा बिन लादेन को मारने के बाद सेना तख़्तापलट करने वाली है.

मेमोगेट के बाद से ही सेना और सरकार के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल में ही राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के अचानक दुबई जाने से अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

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