न किसी ने कहा, न ही पद छोड़ रहा: ज़रदारी

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Image caption मेमोगेट विवाद से पाकिस्तानी सेना और नागरिक सरकार के बीच चल रहे मतभेद और गहरा गए हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने पद छोड़ने की किसी संभावना से इंकार किया है और कहा है कि न ही किसी ने उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा है.

आसिफ़ अली ज़रदारी ने ये बात एक टीवी साक्षात्कार में कही.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी ने एक चर्चित टेलिविज़न कार्यक्रम में कहा, ''अभी तक किसी ने ऐसा करने को नहीं कहा है. अगर कोई कहता है तो मैं आपको बताउंगा.''

पिछले दिनों ये चर्चा ज़ोरों पर रही है कि पाकिस्तान की सेना ये चाहती है कि आसिफ़ अली ज़रदारी सत्ता से बेदख़ल हों.

हाल में ही दुबई से इलाज कराकर लौटे ज़रदारी साक्षात्कार के दौरान सेहदतमंद नज़र आए.

पाकिस्तान की सत्ता में सेना का बड़ा दख़ल है और कहा जाता है कि सुरक्षा और विदेश नीतियों को वही तय करती है. सेना ने पूर्व में देश के कई नागरिक नेताओं को सत्ता से बेदख़ल किया है और देश की बागडोर अपने हाथों में ली है.

लगभग तीन साल पहले, साल 2008 में, सत्ता में आने के बाद ज़रदारी के लिए 'मेमोगेट विवाद' अब तक का सबसे कठिन राजनीतिक संकट साबित हो रहा है.

दरअसल ये मामला एक मेमो का है जिसमें कथित तौर पाकिस्तान की सेना पर दबाव बनाने के लिए ज़रदारी हुकुमत ने अमरीका से मदद मांगी थी.

मेमो पर बवाल

पाकिस्तानी मूल के अमरीका स्थित व्यवसायी मंज़ूर एजाज़ ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स में अपने एक लेख में कहा था कि एक पाकिस्तानी राजनयिक ने उनसे मेमो को अमरीकी प्रशासन के हवाले करने को कहा था.

एजाज़ ने बाद में उस राजनयिक की पहचान राष्ट्रपति ज़रदारी के क़रीबी हुसैन हक्क़ानी के रूप में की. हक्क़ानी उस समय वाशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत थे.

हालांकि हक्क़ानी ने इस मामले में अपने शामिल होने की ख़बरों को ख़ारिज कर दिया था. ऐसे साक्ष्य भी नही मिले है जिससे ये साबित हो सके की पाकिस्तानी सेना तख्तापलट की योजना बना रही थी.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने मेमोगेट मामले पर जांच के आदेश दिए है. माना जा रहा है कि इस फ़ैसले से पाकिस्तान की सरकार कमज़ोर होगी, ख़ासतौर पर अगर मेमो और ज़रदारी के बीच किसी तरह का कोई संबंध सामने आता है.

सेना से मतभेद

मेमोगेट विवाद से पाकिस्तान की सेना और सत्ताधारी पीपुल्स पार्टी सरकार के बीच चल रहे मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं.

इस विवाद से अमरीका और पाकिस्तान के पहले से तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों पर भी दबाव बढ़ा दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान में हालात शांतिपूर्ण रखने के लिए अमरीका को पाकिस्तान की मदद चाहिए, इसलिए वो चाहता है कि पाकिस्तान चरमपंथ और कमज़ोर अर्थव्यव्स्था जैसे मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करें.

रॉयटर्स ने पाकिस्तानी सेना के सूत्रों के हवाले से कहा है कि सेना ज़रदारी से तंग आ गई है और उन्हे क़ानूनी तरीक़े से सत्ता से बाहर करना चाहती है.

हालांकि जानकारों का मानना है कि सत्तापक्ष के नेता के तौर पर ज़रदारी का देश में ख़ासा प्रभाव है और उनको हटाने के लिए किसी प्रकार की ज़ोर जबरदस्ती से पाकिस्तान में हालात और ख़राब हो सकते है.

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