तनातनी की ख़बरों से पटे पाकिस्तानी अख़बार

  • 12 जनवरी 2012
पाकिस्तानी अख़बार
Image caption पाकिस्तानी अख़बारों ने सेना और सरकार की तनातनी की ख़बरों को प्रमुखता से जगह दी है

पाकिस्तान की नागरिक सरकार और सेना के बीच संबंधों में तनाव चरम पर है और अटकलों का बाज़ार भी गर्म है.

देश के सभी अख़बारों ने सरकार और सेना के संबंधों में बढ़ते तनाव की ख़बर को प्रमुखता से छापा है और कुछ अख़बारों ने इस पर संपादकीय भी लिखे हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार ‘डेली डॉन’ लिखता है कि बुधवार का दिन तनावपूर्ण असमंजस की स्थिति से भरा रहा और देर रात तक राजनीतिक गतिविधियाँ भी चरम पर रहीं.

अख़बार ने ने लिखा है कि ताज़ा संकट उस समय शुरू हुआ जब सेना ने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ एक बयान जारी किया और उनको कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई, हालाँकि प्रधानमंत्री ने बाद में पत्रकारों को बताया कि बयान जारी करने से पहले सेनाध्यक्ष ने उनसे बात की थी.

डॉन के मुताबिक़ उस पूरे घटनाक्रम में मीडिया ने चिंगारी का काम किया, जब सेना के 111 ब्रिगेड के प्रमुख को बदल दिया गया.

ग़ौरतलब है कि सेना की 111 ब्रिगेड काफ़ी विवादों में रही है और जब भी सेना ने सत्ता पर क़ब्ज़ा किया है तो उसी ब्रिगेड ने प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति भवन और सरकारी टेलीविज़न पर धावा बोला है.

नियंत्रण

अंग्रेज़ी का एक और अख़बार ‘पाकिस्तान टुडे’ के अनुसार ताज़ा संकट से पता चलता है कि पाकिस्तान में कौन ताक़तवर है और सच में किस का नियंत्रण है.

अख़बार ने लिखा है कि सेना और सरकार के बीच संबंधों में तनाव उस जगह पर पहुँच गया है जहाँ से वापस आना संभव नहीं है.

उर्दू के अख़बार ‘रोज़नामा एक्सप्रेस’ ने लिखा है कि अनिश्चितता के माहौल में स्थिति तेज़ी से बदल रही है और सरकार कई मुद्दों में उलझती जा रही है. न्यायपालिका के साथ भी उसके मतभेद चल रहे हैं.

अख़बार कहता है कि इस ताज़ा संकट के बाद अब सबकी नज़रें सुप्रीम कोर्ट पर हैं क्योंकि सोमवार को एक अहम मुक़मदे की सुनवाई होने जा रही है.

अंग्रेज़ी अख़बार ‘द न्यूज़’ ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बयान को प्रमुखता के प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सेना ने उनके ख़िलाफ़ बयान जारी करने से पहले सेनाध्यक्ष ने उनसे बात की थी.

अख़बार के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘हम हमेशा सेना के साथ रहे और हम किसी के ख़िलाफ़ नहीं हैं.’

न्यूज़ ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि सेनाध्यक्ष और आईएसआई के प्रमुख ने कथित मेमो विवाद पर अदालत में अपना बयान उनकी मंज़ूरी के बिना पेश किया था.

अख़बार ने लिखा है कि देश के लिए चिंता का विषय यह है कि सेना और न्यायपालिका नागरिक सरकार के ख़िलाफ़ हो गए हैं और उनके मतभेद बढ़ते जा रहे हैं.

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