पाकिस्तान कर रहा है तालिबान की मदद: नेटो

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Image caption नेटो रिपोर्ट का दावा है कि भ्रष्टाचार को देखते हुए अफ़ग़ान नागरिक अक्सर तालिबानी सरकार को प्राथमिकता देते है

बीबीसी को मिली नेटो की एक खुफ़िया रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान तालिबान की मदद कर रहा है.

हज़ारों लोगों से पूछताछ के बाद तैयार किए गए इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तालिबान की जड़ें अभी तक मज़बूत हैं और अफ़गानिस्तानी लोगों के बीच उसका काफ़ी प्रभाव है.

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान बड़े तालिबानी नेताओं के ठिकाने जानता है.

एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय शक्तियों और अफ़ग़ानिस्तानी सरकार के लिए निराशा पैदा करने वाली है.

पाकिस्तान पहले कई बार ये जता और बता चुका है कि उसका तालिबान से कोई लेना देना नही है.

पेंटागन के प्रवक्ता कैप्टन जॉन किर्बी ने कहा, ''आईएसआई के लोगों और कुछ चरमपंथी संगठनों के बीच संबंधों को लेकर हम काफ़ी अरसे से चिंतित थे.''

जॉन किर्बी के मुताबिक़ इस रिपोर्ट को अमरीकी विदेश मंत्रालय ने नही देखा है.

काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन समरविले का कहना है कि तालिबान की ताज़ा स्थिति पर पेश की गई ये रिपोर्ट पाकिस्तानी खुफ़िया संगठन आईएसआई और तालिबान के बीच संबंधों की पोल खोलती है.

ये रिपोर्ट 27,000 लोगों से पूछताछ के बाद बनाई गई है जिसमे चार हज़ार से ज़्यादा तालिबानी, अल क़ायदा और अन्य चरमपंथी गुटों के लड़ाकों समेत नागरिक भी शामिल है.

रिपोर्ट में कहा गया, ''पाकिस्तान और तालिबान के शीर्ष नेताओं के बीच संबंध बरक़रार है.'' रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान को तालिबानी नेताओं के ठिकानों के बारे में पता है.

आगे कहा गया है, ''चूंकि ये रिपोर्ट विद्रोहियों पर आधारित है इसलिए इसे जानकारी के रूप में देखा जाना चाहिए ना कि सीधे विश्लेषण के तौर पर.''

सांठगांठ

इस रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा वहीं के सुरक्षाबलों के जिम्मे सौपने की नेटो की रणनीति के बावजूद अफ़ग़ानिस्तानी पुलिस, सेना और विद्रोहियों के बीच सांठगांठ बड़े स्तर पर बनी हुई है.

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई तालिबान के साथ शांति वार्ता चाहते हैं

अफ़ग़ानिस्तान में नेटो की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता दल यानी आईएसएएफ़ के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जिमी कमिंग्स ने कहा, ''ये रिपोर्ट एक गोपनीय आंतरिक दस्तावेज़ है जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाना है.''

जिमी कमिंग्स ने कहा, ''ये हमारी नीतियों का हिस्सा है कि गोपनीय दस्तावेज़ों के बारे में किसी भी हाल में चर्चा नहीं की जा सकती.''

बीबीसी संवाददाता के अनुसार इस रिपोर्ट से पता चलता है कि तालिबान को किस हद तक अफ़ग़ानिस्तानी लोगों का समर्थन को प्राप्त है.

इस रिपोर्ट में अल क़ायदा के प्रभाव में कमी और तालिबान के प्रभाव में तेज़ी देखी जा सकती है.

तालिबानी प्रभाव

इस रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि पिछले साल तालिबान के प्रति लोगों ने अभूतपूर्व समर्थन दिखाया था. यहां तक कि अफ़ग़ानिस्तानी सरकार के सदस्यों ने भी तालिबान ये जुड़ने में रूचि दिखाई थी.

रिपोर्ट में कहा गया, ''सरकारी काम काज में आम तौर पर दिखने वाले भ्रष्टाचार को देखते हुए अफ़ग़ानिस्तानी नागरिक अक्सर तालिबानी सरकार को प्राथमिकता देते है.''

नेटो की इस रिपोर्ट में सबूतों का जिक्र किया गया है जिससे ये साबित होता है कि तालिबान नेटो के सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान से हटने की प्रक्रिया को गति देने के लिए अपने हमले कम कर रहा है, साथ ही लोगों से जुड़ने के अभियान भी चला रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के जिन इलाक़ों को आईएएसएफ़ ने छोड़ा वहां पर तालिबान का प्रभाव बढ़ा है जिसका अफ़ग़ानिस्तानी पुलिस ने प्रतिरोध नहीं किया. तालिबान को वापस लाने में अफ़ग़ानिस्तानी सुरक्षाबलों की सक्रिय भागीदारी दिख रही है.

अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सुरक्षाबलों के जाने के बाद स्थानीय सुरक्षा बलों को कमान संभालनी है.

लेकिन रिपोर्टों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तानी सुरक्षाबलों ने राइफ़ल, पिस्टल और अनेक अग्नेयास्त्र पाकिस्तान के बाज़ार में बेच दिए.

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