मुंबई हमले: पाक आयोग की यात्रा टली

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Image caption मुंबई के हमलों ने पूरी दुनिया को चरमपंथ का नया चेहरा दिखाया

मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए चरमपंथी हमलों की जाँच के लिए आने वाली पाकिस्तान न्यायिक आयोग की टीम ने अपनी यात्रा रद्द कर दी है.

भारत के गृहमंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान ने कूटनयिकों के ज़रिए ये संदेश दिया है कि मुंबई हमलों की जाँच कर रहा आयोग अब भारत नहीं आ रहा है.

हालांकि पाकिस्तान में आयोग की ओर से कहा गया है कि ये दौरा रद्द नहीं हुआ है सिर्फ़ टाला गया है और जल्द ही नई तारीख़ तय कर ली जाएगी.

आयोग की टीम को गुरुवार को मुंबई पहुँचना था. वहाँ उनकी मुलाक़ात मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों और डॉक्टरों से होनी थी.

मुंबई के हमलों में कम से कम 165 लोग मारे गए थे. ये हमले करने वाले दस लोगों में से नौ लोग भी इस दौरान मारे गए थे.

एकमात्र जीवित हमलावर मोहम्मद अजमल आमिर क़साब को हत्या और भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

इस सज़ा के ख़िलाफ़ क़साब ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है.

अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान के आयोग की टीम के न आने की कोई वजह नहीं बताई गई है.

पिछले साल भारत और पाकिस्तान के गृहमंत्रियों की एक बैठक के बाद ये फ़ैसला हुआ था कि पाकिस्तान में मुंबई हमलों की जाँच कर रहा आयोग भारत का दौरा करेगा.

'रद्द नहीं किया कुछ देरी हुई है'

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Image caption क़साब को भी पहले पाकिस्तान अपना नागरिक नहीं मान रहा था

रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में चल रहे मुंबई हमलों के मुक़दमे में अभियोजन पक्ष के वकील चौधरी ज़ुल्फ़िक़ार ने बीबीसी को बताया कि मुंबई हमलों की जाँच के लिए पाकिस्तानी न्यायिक आयोग की भारत यात्रा रद्द नहीं हुई है बल्कि उसमें कुछ देरी हुई है.

उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों के मुक़दमे के मुख्य अभियुक्त ज़की-उर-रहमान लखवी के वकील की मौत हो गई थी, जिसकी वजह से न्यायिक आयोग की यात्रा में देरी हुई है और अब उनके नए वकील ने अदालत में वकालत नामा जमा करवा दिया है.

उन्होंने आगे कहा कि इस मुक़दमे की सुनवाई शनिवार को होगी और अगर जज साहब छुट्टी पर न हुए तो वह न्यायिक आयोग की भारत यात्रा की नई तारीख़ तय करेंगे.

26 नवंबर 2008 को 60 घंटे तक चले हमलों में दस बंदूकधारियों ने रेलवे स्टेशन, होटलों, रेस्तराँ, अस्पताल के अलावा एक यहूदी सांस्कृतिक केंद्र को भी निशाना बनाया था.

इन हमलों के लिए भारत ने पाकिस्तान के चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा को दोषी ठहराया था और उससे सभी तरह की वार्ताएँ स्थगित कर दी थीं.

भारत का कहना था कि सभी दस हमलावर भी पाकिस्तान से आए थे.

पाकिस्तान शुरुआत में इस बात से इनकार करता रहा कि हमले की योजना का एक हिस्सा पाकिस्तान में बना था और हमलावर पाकिस्तानी थे.

लेकिन बाद में उसने स्वीकार कर लिया था कि क़साब पाकिस्तानी नागरिक है.

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