प्रधानमंत्री गिलानी को सुप्रीम कोर्ट का दो टूक जवाब

  • 9 फरवरी 2012
यूसुफ़ रज़ा गिलानी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption यूसुफ़ रज़ा गिलानी के ख़िलाफ़ अभियोग चलाया जा सकता है

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के लिए स्विस अधिकारियों को लिखें तो उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला ख़त्म हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामले में उनकी अग्रिम याचिका की सुनवाई के दौरान दी.

अदालत ने कहा कि अगर गिलानी राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के लिए स्विस अधिकारियों को लिखें तो उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला भी वापस ले लिया जाएगा.

जस्टिस साक़िब निसार ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री का यही रैवया बरक़रार रहा तो पूरा सिस्टम ख़तरे में पड़ सकता है.

अदालत ने प्रधानमंत्री के वीकल ऐतेज़ाज़ एहसन से कहा कि वह शुक्रिवार 11 बजे तक अपने दलीली पूरे करें और उस के बाद फ़ैसला सुनाया जाएगा. बाद में अदालत ने सुनाई शुक्रवार तक के लिए स्थागित कर दी.

याचिका

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना के मामले में अग्रिम याचिका दायर की थी.

बताया जा रहा था कि उन्होंने ये याचिका इसलिए दायर की थी क्योंकि उन्हें आशंका थी कि अदालत उनके ख़िलाफ़ अभियोग तय कर सकती है.

उस अर्ज़ी में अदालत से अनुरोध किया गया था कि याचिका पर फ़ैसला होने तक दो फ़रवरी के अदालती फ़ैसले पर अमल न किया जाए.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने दो फ़रवरी को अदालत की अवमानना करने के आरोप में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी पर अभियोग शुरू करने का फ़ैसला लिया था.

अदालत ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को 13 फ़रवरी को पेश होने का आदेश भी दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को कई नेताओं को मिली आम माफ़ी के मामले में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया था.

प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे और अदालत को बताया था कि पाकिस्तान के संविधान के तहत राष्ट्रपति ज़रदारी पर कोई मामला नहीं चलाया जा सकता.

गिलानी पर आरोप है कि उन्होंने ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए स्विस अधिकारियों से आग्रह न करके अदालत की अवमानना की है.

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