पाक सैन्य अफ़सरों के ख़िलाफ़ मुक़दमा

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Image caption पाकिस्तानी सेना पर अमरीका गंभीर आरोप लगाता रहा है

पाकिस्तान से आ रही रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि सेना ने गिरफ़्तार किए गए पाँच सैन्य अफ़सरों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है. उन पर प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन हिज़्ब-उत-तहरीर के साथ संबंध रखने का आरोप है.

इन अफ़सरों में ब्रिगेडियर अली ख़ान शामिल हैं जिन्हें पिछले मई रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय से गिरफ़्तार किया गया था.

उन पर हिज़्ब-उत-तहरीर के साथ संबंध रखने और उसे समर्थन देने का आरोप है. उनके परिवार ने आरोपों को गलत बताया है.

पाकिस्तान में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अफ़सरों पर कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया जल्द शुरु होगी.

अभी ये साफ़ नहीं है कि इन अफ़सरों के खिलाफ़ सुनवाई कहाँ चल रही थी या फिर आरोप साबित हो जाने पर उन्हें कितनी सज़ा मिल सकती है.

अमरीका के ख़िलाफ

हिज़्ब-उत-तहरीर संगठन दुनिया भर में इस्लाम फ़ैलाने की बात करता है.

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Image caption बिन-लादेन को राजधानी इस्लामाबाद के निकट सैन्य शहर ऐबटाबाद में मार गिराया गया था

पाकिस्तान में ये संगठन अमरीका के साथ पाकिस्तान के संबंधों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करता रहा है.

संगठन का कहना है कि वो हिंसा का पक्षधर नहीं है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि हिज़्ब-उत-तहरीर असहिष्णुता की मानसिकता का प्रचार करता है.

पश्चिमी देश लंबे समय से मानते रहे हैं कि कुछ पाकिस्तानी सैन्य अफ़सरों के इस्लामी संगठनों के साथ नज़दीकी संबंध हैं.

इस मान्यता को और बल मिला जब ओसामा बिन-लादेन को राजधानी इस्लामाबाद के निकट सैन्य शहर ऐबटाबाद में मार गिराया गया था, हालाँकि अमेरिकी अधिकारी ये भी कहते हैं कि उन्हें इस बात के सुबूत नहीं मिले हैं कि वरिष्ठ सैन्य अफ़सरों को बिन लादेन के घर के बारे में पता था.

पाकिस्तानी सेना ने ऐसे किसी भी आरोप का खंडन किया है.

उधर ब्रिगेडियर खान के वकील कर्नल इमान रहीम का कहना है कि उनके मुवक्किल को गिरफ़्तार करने का कारण ये था कि उन्होंने बिन लादेन को मारने के लिए किए गए अमेरिकी ऑपरेशन के लिए पाकिस्तानी सेना में किसी की ज़िम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की थी.

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