'जेहाद' के लिए चरमपंथी संगठन हुए एकजुट

  • 12 फरवरी 2012
पाकिस्तान
Image caption जमात-उद-दावा ‘दिफ़ा-ए-पाकिस्तान काउंसल’ में सक्रिय भूमिका निभा रही है

पाकिस्तान में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने जेहाद के लिए सर्वजानिक रुप से आम लोगों को प्रोत्साहित करना शुरु कर दिया है.

जेहाद की यह लड़ाई अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में उसके सहयोगी देश और भारत के ख़िलाफ़ है.

‘दिफ़ा-ए-पाकिस्तान काउंसल’ यानी पाकिस्तान की रक्षा की परिषद के मंच पर जमात-उद-दावा, लश्करे झंगवी, जमात-ए-इस्लामी, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (समी गुट) सहित कई प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन एक जुट हुए हैं.

इसमें ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख सेवानिवृत्त जनरल हमीद गुल, पूर्व सैन्य शासक ज़िया-उल-हक़ के पुत्र ऐजाज़ुल हक़ और पूर्व राष्ट्रपति व सैन्य शासक परवेज़ के कार्यकाल में रहे सूचना मंत्री शेख़ रशीद भी शामिल हैं.

इन तीनों व्यक्तियों के शामिल होने और प्रतिबंधित गुटों के साथ सक्रिय होने से संकेत मिलता है कि इन चरमपंथी संगठनों को देश के ख़ुफ़िया एजेंसियों का पूरा समर्थन प्राप्त है.

सक्रियता

जमात-उद-दावा ‘दिफ़ा-ए-पाकिस्तान काउंसल’ में सक्रिय भूमिका निभा रही है और जामात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद ने दो दिन पहले बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा था कि उन्होंने ही सभी गुटों को एक जुट होने की सलाह दी थी.

करीब एक महीना पहले भी प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों ने लाहौर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, उसके बाद मुल्तान, रावलपिंडी और अब कराची में एक बड़ी रैली में अपनी ताक़त दिखाई.

जमात-उद-दावा ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की समाधि को अपनी रैली के लिए चुना और मज़े की बात यह है कि रैली में आने वाले अधिकतर धार्मिक और चरमपंथी गुटों के नेता उनको मानते ही नहीं हैं.

रैली की सुरक्षा व्यवस्था जमात-उद-दावा के हाथ में थी और चार हज़ार के करीब हथियारबंद निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, साथ ही 20 से ज़्यादा घुड़सवार निजी सुरक्षाकर्मी लगातार मैदान का चक्कर लगा रहे थे.

पुलिस और अर्धसैनिकबलों के जवानों ने मैदान को चारों ओर से घेरा हुआ था लेकिन उनकी संख्या बहुत कम थी.

रैली में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों से नेताओं ने जोशीले भाषण दिए. साथ ही अमरीका, पश्चिमी देशों और भारत के ख़िलाफ़ जेहाद की लड़ाई शुरु करने की घोषणा की.

भड़काऊ भाषण

Image caption करीब एक महीना पहले भी प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों ने लाहौर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था

रैली को संबोधित करने वाले अधिकतर चरमपंथी नेता वहीं थे, जिन पर पाकिस्तान में भड़काऊ भाषण देने और जेहाद के लिए प्रोत्साहित करने के आरोप में मुक़दमे भी दर्ज हैं.

जमात-उद-दावा के मुखिया हाफ़िज़ सईद ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अमरीका, इस्राइल और भारत सभी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लगातार साज़िश कर रहे हैं और अब वक़्त आ गया है कि उन साज़िशों का डट कर मुक़ाबला किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि दिफ़ा-ए-पाकिस्तान काउंसल अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के लिए पाकिस्तान के रास्ते सामान की आपूर्ति होने नहीं देगी और अगर सरकार ने फिर से अनुमति दी तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा.

लश्करे झंगवी ने वरिष्ठ नेता मौलाना अहमद फ़ारुक़ी ने कहा, ‘हम अमरीका को बता देना चाहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए अगर पाकिस्तान रास्ते ने उनका सामान गया तो हम उसको ज़बरदस्ती रोकेंगे.’

उन्होंने बताया कि नेटो सेना को पाकिस्तान के रास्ते सामान की आपूर्ति के ख़िलाफ़ 20 फ़रवरी को इस्लामाबाद संसद के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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