कराची के जिहादी मेले के आकर्षण

  • 13 फरवरी 2012
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Image caption कराची में जेहादी संगठ की रैली में घुड़सवार भी नज़र आए.

आम तौर पर पाकिस्तान में मज़ारों पर मेले लगते रहते हैं और थोड़े-बहुत फ़र्क़ के साथ सारे मेले का रंग लगभग एक ही तरह का होता है.

लेकिन पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के मज़ार पर रविवार को लगे मेले का दृश्य कुछ अलग ही था.

जिन मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान में आधुनिक इस्लामी व्यवस्था का प्रचार किया था उनके मज़ार के क़रीब खुले मैदान में तालेबानी तर्ज़ का समर्थन किया गया और इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इसे लागू करना ही मज़बूत पाकिस्तान की ज़मानत है.

एक वक्ता ने मोहम्मद अली जिन्ना की सुपुत्री दीना जिन्ना के हवाले से दावा किया कि दीना ने एक हिंदू से शादी करने की इच्छा जताई तो मोहम्मद अली जिन्ना ने उन्हें ऐसा करने से रोका और कहा कि वह चाहे किसी से भी शादी कर लें मगर वह किसी हिंदू से शादी की उन्हें हरगिज़ इजाज़त नहीं देंगे.

इस उदाहरण के ज़रिए वह हिंदुओं के बारे मोहम्मद अली जिन्ना की सोच पेश करने की कोशिश कर रहे थे.

इस मेले में जिहाद में विश्वास करने वाले संगठनों के कैम्प लगे हुए थे और जिहाद क्यों ज़रूरी है इस पर किताबें भी बेची जा रहीं थीं.

पेट और दिमाग़ दोनों की ख़ुराक इस मेले में थी. हलीम के ठेले, बिरयानी के तंबू, मिनरल वॉटर के स्टॉल के साथ मिठाई और केक थालों में बिकते नज़र आए वहीं कुछ वृद्ध दातून, टोपी, तस्बीह (माला), और अलकोहल से मुक्त ख़ुश्बू बेचते नज़र आए.

हर स्टॉल पर किसी न किसी जिहादी संगठन का झंडा ज़रूर लगा हुआ था.

ज़मीन पर प्रतिबंधित संगठन सिपाहे-सहाबा के बिल्ले, कैलेंडर और स्टीकर भी बेचे जा रहे थे. इसके साथ मोबाइल फ़ोन के पाउच पर वही बातें लिखी हुई थीं जो उनकी विचारधारा को दर्शाती हैं.

सीडी भी मिल रही थी

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Image caption इस रैली में जमात-उ-दावा प्रमुख रुप से शामिल थी.

कई जगह वीडियो सीडी और एमपी-3 सीडी भी मिल रही थी जिनमें भारत में लश्करे-तैबा की कार्रवाईयाँ तरानों के साथ, भारत में फ़िदाई कार्रवाइयाँ, अफ़ग़ानिस्तान में जुनदुल्लाह की कार्रवाईयाँ और स्पेशल ट्रेनिंग के टाइटल लगे हुए थे. 30 रुपए में एक सीडी मिल रही थी.

मोबाइल फ़ोन के मेमोरी कार्ड में जिहादी तराने और आयतें डालने की भी सहूलियत दी जा रही थी लेकिन मुफ़्त नहीं.

युवाओं के लिए कपड़े और पैराशूट से बनी हुई कमांडो जैकेट भी आकर्षण के लिए वहां मौजूद थी. स्टॉल के मालिक का कहना था कि वह 400 और 600 रुपए में कई जैकेट बेच चुके थे.

कलाशनिकोव और दूसरे आधुनिक हथियारों की चैन का स्टॉल भी युवकों को आकर्षित कर रहा था, जहां 150 रूपए में चार इंच की कलाशनिकोव का मालिक बनाया जा रहा था.

ड्रोन हमले, नैटो की सप्लाइ, डॉक्टर आफ़िया सिद्दीक़ी, भारत से दोस्ती की सरकार की इच्छा, बलूचिस्तान की बेचैनी सब कुछ वही था.

परिसर के चारों ओर चौकी बनाई गई थी जहां जमात उद-दावा के सशस्त्र कार्यकर्ता दूरबीन की मदद से निगरानी करते नज़र आ रहे थे. इसके अलावा दो दर्जन के क़रीब क्लोज़ सर्किट कैमरे भी लगाए गए थे.

पिछले तीन महीने में यहाँ पर यह चौथा जलसा था. इससे पहले जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के जलसे के अलावा इमरान ख़ान, जमीअत उलमा-ए-इस्लाम के मौलाना फ़ज़लुर्रहमान और पाकिस्तान दिफ़ा काउंसिल के इस जलसे में स्वर और शब्द के अलावा भाषण का विषय लगभग एक जैसा था.

मौलाना फ़ज़लुर्रहमान के जलसे के मुक़ाबले इसमें लोग ज़रा कम संख्या में थे. मौलाना के जलसे में मदरसे के उस्ताद और छात्रों की भारी संख्या थी जो इसमें नहीं दिखी जिससे यह स्पष्ट होता है कि मदरसे वाले ख़ुद को जिहादी विचारधारा वाले लोगों से अलग रखना चाहते हैं.

जमाते इस्लामी के भी कार्यकर्ता कम संख्या में थे, उनके एक नेता का कहना था कि ऐसा जानबूझ कर किया गया है.

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