ऐबटाबाद: ओसामा परिसर आधे से ज्यादा गिराया गया

  • 26 फरवरी 2012
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पाकिस्तान में ऐबटाबाद स्थित ओसामा बिन लादने के प्रांगण को ढहाने का काम चल रहा है. लाहौर के नज़दीक मौजूद पाकिस्तान की सैनिक छावनी वाले शहर ऐबटाबाद के इसी घर में ओसामा बिन लादेन ने कथित तौर पर पांच साल बिताए थे.

अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत पिछले साल मई में ऐबटाबाद के इसी मकान में अमरीकी फ़ौज के एक हमले के दौरान हो गई थी.

इमारत का एक बड़ा हिस्सा बुलडोज़रों की मदद से गिरा दिया गया है. शनिवार को अंधेरा होते ही बुलडोज़र लाए गए और रात भर इमारत को गिराने का काम चलता रहा.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार नहीं चाहती कि ये इमारत कोई स्मारक का दर्जा हासिल करे.

शहरियों का कहना है कि सुरक्षाबलों ने प्रांगण की तरफ़ जानेवाले रास्ते की नाकाबंदी कर दी गई थी. इस अभियान को देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों ने बताया है कि ये अभियान शुरु करने से पहले सेना ने इमारत का जिम्मा प्रशासन को सौंप दिया था.

'ताकि स्मारक का दर्जा न मिले'

अधिकारियों के मुताबिक दो मई 2011 के अमरीकी छापे के बाद ही ये तय कर लिया गया था कि प्रांगण को गिरा दिया जाएगा. लेकिन जब पाकिस्तान सरकार ने ओसामा के ठिकाने पर अमरीकी छापे की न्यायिक जाँच के लिए आयोग बना दिया तो इस फ़ैसले पर रोक लगा दी गई.

एक अधिकारी ने बताया, अब आयोग ने अपना काम लगभग पूरा कर लिया है. जाँच के लिए इस इमरात की ज़रूरत नहीं है.

उनका कहना है कि इस जगह को देखने के लिए लगातार लोग आते रहे हैं और इस अहम कस्बे की सुरक्षा के लिए ये खतरा हो सकता है.

इस्लामाबाद से बीबसी संवाददाता इलियास ख़ान ने नागरिकों के हवाले से कहा है कि इलाक़े में कर्फ़्यू जैसे हालात हैं और लोगों को घर से बाहर निकलने की मनाही है. लेकिन कई लोगों ने प्रांगण से बुलडोज़रों और खुदाई किए जाने की आवाज़े सुनी .

ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सीमा में अमरीकी कार्रवाई के बाद अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में भारी तनाव आया आ गया था जो अभी तक जारी है.

इस कार्रवाई के कारण पाकिस्तान को भारी शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ा था क्योंकि उस पर एक ऐसे व्यक्ति को पनाह देने के आरोप लगने लगे थे जिसकी तलाश पूरी दुनिया को थी.

अमरीकी कार्रवाई को पाकिस्तान ने अपनी संप्रभुता में दख़लअंदाज़ी क़रार दिया था और पूरे पाकिस्तान में अमरीका विरोधी प्रदर्शन भी हुए थे.

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