'लोग मुझे पीएम नहीं पिअन समझते हैं'

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Image caption प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा कि वह राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ मुकदमे से जुड़ी कोई चिट्ठी नहीं लिख सकते

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने एक बार फिर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का बचाव करते हुए न्यायपालिका को कड़ा संदेश दिया है.

उन्होंने दक्षिणी पंजाब के ज़िले बहावलपुर के एक विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए कहा कि अदालत की अवमानना कर जेल में छह महीने की कैद काट लेंगे लेकिन राष्ट्रपति के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे खुलवाने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र नहीं लिखेंगे.

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि वह उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बल्कि चपरासी समझते हैं. “दरअसल पीएम और पीअन में थोड़ा सा फर्क है लेकिन मैं चपरासी बिल्कुल नहीं हूँ.”

बीबीसी हिंदी संवाददाता हफ़ीज़ चाचड़ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले अपने फैसला में कहा था कि स्विस अधिकारियों को पत्र न लिख कर प्रधानमंत्री ने अदालत की अवमानना की है.

अदालत प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को आदेश दे चुकी है कि वह किसी से सलाह बिना राष्ट्रपति के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मुकदमे फिर से खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को लिखें लेकिन वे कह चुके हैं कि वे पत्र नहीं लिखेंगे.

उन्होंने अपने भाषण में कहा कि अगर वह पत्र लिखते हैं तो वह संविधान का उल्लंघन करते हैं क्योंकि संसद ने राष्ट्रपति को अधिकार दिया है कि जब तक वह राष्ट्रपति पद पर हैं, उनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.

अवमानना

उन्होंने कहा, “अगर मैं पत्र लिखता हूँ तो वह एक असंवैधानिक कदम होगा और संविधान की धारा छह लागू होगी, जिसकी सज़ा मौत है.”

उनके मुताबिक अगर वे पत्र नहीं लिखते हैं तो वह अदालत की अवमानना होगी और अदालत की अवमानना की सज़ा छह महीने हैं.

प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से पूछा, “अब आप मुझे बताएँ कि मेरे लिए छह महीने की सज़ा सही है या फांसी की सज़ा बेहतर है?” क्या मुझे पत्र लिखना चाहिए या नहीं? अधिकतर विद्यार्थियों ने नहीं में जवाब दिया.

“फिर हम आपका संदेश उन तक पहुँचाएँ कि देखें जनाब या तो संसद के खिलाफ अदालत की अवमानना होनी चाहिए जिसने राष्ट्रपति को अधिकार दिया है और यह अधिकार पूरी दुनिया में है.”

प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा कि वे राजनीति छोड़ सकते हैं लेकिन अपनी पार्टी को धोखा नहीं दे सकते हैं और यह संभव नहीं है कि प्रधानमंत्री अपने ही राष्ट्रपति की पीठ में छुरा घोंप दे.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को अदालत की अवमानना के मामले में प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी पर अभियोग लागू कर दिया था.

उन पर आरोप थे कि उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए स्विस अधिकारियों से आग्रह न करके अदालत की अवमानना की है.

गिलानी पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन पर अदालत की अवमानना के मुक़दमे में अभियोग लागू किया गया है. इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अदालत की अवमानना करने का नोटिस जारी किया गया था.

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