'सेना पर आरोपों से मनोबल घट रहा है'

  • 15 मार्च 2012
जनरल कियानी और जनरल पाशा इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पाकिस्तानी सेना और आईएसआई पर हमेशा से ही राजनीति में हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं.

पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक परवेज़ कियानी ने कहा है कि राजनीति में हस्तक्षेप को लेकर सेना पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं जिससे सैनिकों का मनोबल घट रहा है.

उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री आवास में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. उन्होंने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की ओर से वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल राव कमर सुलतान के सम्मान में दिए गए रात्रिभोज में भाग लिया.

उन्होंने बताया कि 1990 के आम चुनावों में पीपुल्स पार्टी को पराजित करने में सेना और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी की कोई भूमिका नहीं थी.

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आरोप लगाना और राष्ट्रीय संस्थानों को कमज़ोर करना देश के लिए हमेशा हानिकारक सिद्ध हुआ है.

ग़ौरतलब है कि इन दिनों सुप्रीम कोर्ट एक मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें सेना और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी पर आरोप लगाया गया है कि उसने 1990 के आम चुनावों में पीपुल्स पार्टी को पराजित करने के लिए विभिन्न राजनेताओं में रकम बाँटी थी.

रकम लेने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ सहित पीपुल्स पार्टी के कई विरोधी दल और अधिकारी शामिल थे.

जनरल कियानी ने कहा, “राष्ट्रीय संस्थानों का एक रात में नहीं बल्कि काफी मुश्किल से निर्माण हुआ है और किसी को भी इसे कमज़ोर करने में हिस्सा नहीं बनना चाहिए.”

'सेना को काम करने दिया जाए'

उन्होंने बताया, “मैंने करीब साढ़े चार साल पहले फैसला लिया था कि सेना राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करेगी और उसके बाद सेना राजनीति से दूर रही है. मैं अपने फैसले पर कायम हूँ और रहूँगा और मैं आपको आश्वासन देता हूँ कि सेना राजनीति से दूर रहेगी और उसकी प्रशंसा करनी चाहिए.”

उनके मुताबिक़ पाकिस्तान में कुछ लोग ख़ुफिया एजेंसियों को बदनाम कर रहे हैं जबकि राजनीति में हस्तक्षेप को लेकर उनके पास कोई सबूत भी नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “इस प्रकार के आरोप नहीं लगाने चाहिए क्योंकि इस से उन सैनिकों का मनोबल घट रहा है जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जानों का बलिदान कर रहे हैं.”

अशफाक परवेज कियानी ने कहा कि सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को अपनी सीमाओँ और अधिकार क्षेत्र में रहते हुए काम करने दिया जाए और उसके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.

इमरान ख़ान को आईएसआई के समर्थन पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि इमरान ख़ान की जनसभाओं से आईएसआई का कोई संबंध नहीं है और इमरान ख़ान को भी इस धारणा को ख़त्म करने के लिए आगे आना चाहिए.

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