पाकिस्तान:'अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना'

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Image caption शिया और अहमदिया समुदाय के लोगों पर बराबर हमले होते रहे हैं.

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति लगातार खराब हो रही है और वह अपनी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं.

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने इस्लामाबाद में वर्ष 2011 की रिपोर्ट जारी की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल 389 अल्पसंख्यक मुसलमानों की हत्या की गई और उसमें 100 के करीब 'हज़ारा शिया' भी शामिल थे.

रिपोर्ट के मुताबिक़ जिन लोगों की हत्या की गई उनमें सबसे अधिक शिया समुदाय के थे. कहा गया है कि अहमदी समुदाय भी हिंसा का शिकार रहा.

मानवाधिकार आयोग का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय विशेषकर हिंदू अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और अहमदियों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

हिंदू

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल कई ऐसी घटनाएं हुई जिसमें हिंदु समुदाय को लोगों पर हिंसा की गई और उन्हें धमकियां दी गईँ जबकि हिंदु लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी की घटनाएं सामने आईँ हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदु समुदाय के 150 से अधिक लोगों ने भारत में शरण ली और भारतीय अधिकारियों से कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान वापस भेजा गया तो उनका जीवन ख़तरे में रहेगा.

रिपोर्ट में लिखा है कि ‘वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद उन लोगों को भारत में गिरफ्तार किया गया और दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय सरकार को आदेश दिया कि इन लोगों भारत से निकाला न जाए.’

मानवाधिकार आयोग का कहना है कि पाकिस्तानी समाज में सहनशक्ति खत्म हो रही है. रिपोर्ट में उदहारण देते हुए कहा गया है कि एक मामले में आठवीं कक्षा के एक छात्र पर ईश-निंदा का आरोप लगाया गया वो भी महज इसलिए क्योंकि वो एक शब्द का उच्चारण सही नहीं कर पाया था.

रिपोर्ट में इज़्ज़त के नाम पर महिलाओं की हत्या की भी विस्तार से जानकारी दी गई और बताया गया कि पिछले साल करीब 943 महिलाओं और लड़कियों को इज़्ज़त के नाम पर क़त्ल किया गया.

मरने वाली महिलाओं में सात ईसाई और दो हिंदू भी शामिल थीं.

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