संबंधों में तनाव को कम करने के प्रयास तेज़

  • 28 मार्च 2012
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Image caption पिछले साल नवंबर में पाकिस्तानी चौकी पर हमले के बाद पाकिस्तान और अमरीका के बीच संबंध तनाव का शिकार हैं.

पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों में तनाव को कम करने के लिए अमरीका और अफगानिस्तान में मौजूद नेटो सेना के वरिष्ठ अधिकारी पाकिस्तान पहुँच गए हैं.

अमरीकी सेना की सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल जेम्स मेटिस और अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना के प्रमुख जनरल जॉन ऐलन ने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक परवेज़ कियानी से मुलाकात की है.

पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी एक प्रेस बयान में कहा गया है कि करीब चार महीने पहले नेटो सेना की ओर से पाकिस्तानी चौकियों पर हमले के बाद दोनों के बीच में यह उच्च स्तरीय संपर्क है.

बयान में बताया गया है कि दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर हुए हमले की जाँच और पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा की सुरक्षा को लेकर सहयोग पर बातचीत होगी.

ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर 2011 को नेटो सेना के हेलिकॉप्टरों ने पाकिस्तान के कबायली इलाके मोहमंद एजेंसी में फौजी चौकी पर हमला किया था, जिसमें 16 सैनिक मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे.

'खाद्य सामग्री पर रोक'

पाकिस्तानी सरकार ने उस हमले की कड़ी आलोचना की थी और अमरीका और नेटो के साथ सहयोग नीति पर पुनर्विचार करने का फैसला लिया था. साथ ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में मौजूद नेटो के लिए सामान और खाद्य सामग्री पर रोक लगा दी थी.

करीब एक महीने पहले केंद्रीय दूरसंचार मंत्री डॉक्टर अरबाब आलमगीर ने बीबीसी को बताया था कि नेटो, अमेरिका और गठबंधन सेना के लिए अफगानिस्तान जाने वाले यातायात के कारण पाकिस्तान की सड़कों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा और दो साल पहले किए गए सर्वेक्षण के अनुसार पाकिस्तान एक अरब डॉलर का नुकसान बर्दाश्त कर चुका है.

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Image caption संबंधों में तनाव के बाद पाकिस्तान में अमरीका विरोधी भावनाएँ भी अपने चरम पर हैं.

अफगानिस्तान में अमरीका और नेटो सेना के लिए सामान का रास्ते खोलने और अमरीका से साथ संबंधों पर पुनर्विचार करने के लिए संसद की सुरक्षा समिति ने पहले कुछ प्रस्ताव दिए थे.

सुरक्षा समिति के प्रस्ताव में कहा गया था कि अमरीका पाकिस्तानी फौजी चौकी पर हमले के लिए बिना शर्त माफी मांगे और कबायली इलाकों में ड्रोन हमले बंद कर दे.

'संसद लेगी फैसला'

प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने भी कहा था कि नेटो सेना के लिए सामान का रास्ता खोलने और अमरीका के साथ संबंधों पर पुनर्विचार का फैसला संसद की समिति करेगी.

सोमवार को ताजकिस्तान में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी और पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत मार्क ग्रास्मेन के बीच मुलाकात हुई थी जहाँ ज़रदारी ने उन्हें बताया था कि अब संसद ही अमरीका के साथ संबंधों का फैसला लेगी और उसको नकारा नहीं जा सकता है.

मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ज़रदारी ने कबायली इलाकों में हो रहे अमरीकी ड्रोन विमानों को बंद करने की भी मांग की थी और कहा था कि उन हमलों में आम नागरिकों की मौत से चमरपंथ में बढ़ोत्तरी हो रही है.

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