पाकिस्तानी कश्मीर में कश्मीर टैक्स का विरोध

  • 29 मार्च 2012
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Image caption भारतीय कश्मीर में पिछले दो दशक से भी अधिक समय से चरमपंथ की छाया बनी रही है

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों ने कश्मीर की आज़ादी के नाम पर वसूले जानेवाले टैक्स का विरोध करते हुए सरकार से इसे ख़त्म करने की माँग की है.

ये टैक्स पिछले दो दशक से भी अधिक समय से भारत प्रशासित कश्मीर में आत्मनिर्णय के लिए चलनेवाले आंदोलन की मदद के लिए लिया जा रहा है.

ये आंदोलनकारी चाहते हैं कि भारतीय कश्मीर के भविष्य का फ़ैसला वहीं के लोगों को करना चाहिए.

पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर आंदोलनकारियों की मदद के लिए एक संस्था – कश्मीर लिबरेशन सेल – बनाई हुई है.

इस सेल के लिए पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों के अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, निर्वाचित प्रतिनिधियों, न्यायाधीशों और कॉर्पोरेशन कर्मचारियों से टैक्स लिया जाता है

मगर अब पाकिस्तानी कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों को लगता है कि परिस्थितियाँ बदल गई हैं और ना तो इस संस्था और ना ही इस टैक्स का कोई मतलब रह गया है.

बेमतलब

पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर इस टैक्स में बढ़ोत्तरी की जिससे नाराज़ होकर सरकारी कर्मचारियों ने पाकिस्तानी नियंत्रण वाले कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में प्रदर्शन किया.

पाकिस्तानी कश्मीर में राजपत्रित कर्मचारियों के संगठन की उपसभापति साजिदा बहार ने कहा कि ऐसे समय में जबकि महँगाई बढ़ रही है, सरकारी कर्मचारी इस टैक्स को बढ़ाने की निन्दा करते हैं.

उन्होंने कहा,"हमें लगता है कि कश्मीर का संघर्ष अब काफ़ी सिमट गया है और कश्मीर आंदोलन के लिए कुछ भी नहीं किया जा रहा. सरकार ने कश्मीर सेल में कर्मचारियों को रखा हुआ है मगर हम कुछ भी होता हुआ नहीं देख रहे.

"ये एक राजनीतिक संस्था बनकर रह गया है जहाँ राजनीतिक नियुक्तियाँ होती हैं और लोग सरकारी कर्मचारियों के पैसे से सैर-सपाटा करते हैं."

पाकिस्तानी कश्मीर में चिकित्साकर्मियों के संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर महमूद ख़ान ने बताया,"सारे कर्मचारी इससे नाराज़ हैं, उनका कहना है ये सही नहीं है क्योंकि हमें पहले भी कभी नहीं बताया गया कि इस पैसे को ख़र्च कैसे किया जा रहा है, और अभी भी हमें ठीक से पता नहीं कि इस पैसे का क्या हो रहा है."

प्रदर्शन में आए एक और कर्मचारी नेता शेख़ निसार ने कहा,"जब ये सेल बना था तो आज़ाद कश्मीर के सभी लोगों ने कहा था कि वे अपना सबकुछ क़ुर्बान करने के लिए तैयार हैं, तो हमने अपने वेतन में कटौतियाँ करवाईं. मगर अब सूरत-ए-हाल बिल्कुल बदल गया है, तो अब हम मजबूर हैं ये कहने के लिए कि ये टैक्स ना बढ़ाया जाए."

मगर पाकिस्तानी नियंत्रण वाले कश्मीर की सरकार इस टैक्स को बढ़ाने की हिमायत करती है.

पाकिस्तानी कश्मीर के वित्तमंत्री कहते हैं चौधरी लतीफ अकबर कहते हैं,"वक़्त बीतने के साथ-साथ हमारी ज़रूरतें बढ़ गई हैं, इसलिए दूसरे बजटों की तरह इसका भी बढ़ना ज़रूरी हो गया था."

ख़र्च और विरोध

बीबीसी के मुज़फ़्फ़राबद संवाददाता ज़ुल्फ़िकार अली का कहना है कि सरकारी अधिकारियों के एक अनुमान के अनुसार कश्मीर लिबरेशन सेल के 1987 में गठन के बाद से लेकर अब तक एक अरब रूपए से अधिक ख़र्च हो चुके हैं.

इसमें से अधिकतर राशि कर्मचारियों की तनख़वाह और दफ़्तर के इंतज़ाम पर ख़र्च हुई है.

लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने ये कहते हुए इस बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया है कि ऐसा करना देश के हित में नहीं होगा.

पाकिस्तानी नियंत्रण वाले कश्मीर के निवासी भी सरकार की नाराज़गी के डर से इस बारे में कुछ भी खुलकर बोलने से बचते रहे थे.

मगर अब उन्होंने इस बारे में ख़ुलकर बोलना शुरू कर दिया है.

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