आराम से घूमा करते हैं हाफ़िज़ सईद

  • 3 अप्रैल 2012
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Image caption हाफ़़िज़ सईद को अमरीका ने आतंकवाद के ज़िम्मेदार लोगों की सूची में दूसरे नंबर पर रखा है

अमरीका ने पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को गिरफ्तार करने या गिरफ्तारी में मदद देने के लिए एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की है.

हाफ़िज़ सईद प्रतिबंधित संगठन जमात उद दावा के प्रमुख और चरमपंथी गुट लश्करे तैबा के संस्थापक हैं और उन पर वर्ष 2008 में हुए मुंबई हमलों सहित कई आतंकवादी कर्रवाईयाँ करवाने का आरोप है.

अमरीका की ओर से जारी दुनिया में 'आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार' लोगों की सूची में हाफ़िज़ मोहम्मद सईद दूसरे नंबर पर हैं.

अमरीका ने चार वरिष्ठ चरमपंथियों पर एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा है, जिसमें हाफिज़ सईद, तालिबान के प्रमुख मुल्ला उमर, अल कायदा के वरिष्ठ नेता अबू दुआ और यासीन अल-सूरी शामिल हैं.

मज़े की बात यह है कि इन चार चरमपंथियों में से केवल एक व्यक्ति ऐसा है जो आज़ादी से पाकिस्तान में घूम रहा है और सार्वजनिक तौर पर सभाओं को संबोधित कर रहा है - हाफिज़ मोहम्मद सईद.

बाक़ी चरमपंथी, मुल्ला उमर, अबू दुआ और यासीन अल-सूरी का किसी को कुछ पता नहीं है कि वह कहाँ हैं? यूँ समझ लीजिए वह गुफाओं में छिपे हुए हैं.

मैंने इसी वर्ष की 11 फरवरी को कराची के केंद्र में स्थित एक इस्लामी मरदसे में हाफिज़ सईद से मुलाक़ात की थी और उनका इंटरव्यू लिया था.

हाफिज़ सईद पर अमरीकी इनाम की ख़बर सुनते ही मुझे आश्चर्य ज़रुर हुआ क्योंकि इतनी बड़ी रकम एक ऐसे व्यक्ति की जानकारी देने के लिए रखी गई है जो पूरे पाकिस्तान में स्वतंत्र रुप से घूम रहा है.

जेहाद

हाफिज़ सईद ने अफग़ानिस्तान में जेहाद का प्रचार करने और लोगों को प्रत्साहित करने के लिए 1985 में जमात उद दावा वल इरशाद की स्थापना की और लश्करे तैबा उसकी शाखा बनी.

1990 के बाद जब सोवियत संघ ने अफ़ग़ानिस्तान को ख़ाली कर दिया तो हाफिज़ सईद ने अपने जेहाद के मिशन को अफ़ग़ानिस्तान के भारत प्रशासित कश्मीर की ओर मोड़ दिया.

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Image caption लाहौर में हाफ़िज़ सईद का घर, पाकिस्तान में वे बिल्कुल सामान्य जीवन बिताते हैं

लश्करे तैबा भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथी कार्रवाईयाँ करने वाला बड़ा पाकिस्तानी संगठन है जिसको पाकिस्तानी सेना और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का समर्थन प्राप्त है.

भारत सरकार 2003, 2005 और 2008 में हुए आतंकवादी हमलों के लिए लश्करे तैबा को ज़िम्मेदारी मानती है. भारतीय संसद पर हमले की कड़ी भी इसी गुट से मिलती है.

11 सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमलों के बाद लश्करे तैबा पर अंतरराष्ट्रीय देशों की नज़रें टिकीं और वर्ष 2002 में पाकिस्तानी सरकार ने लश्करे तैबा पर प्रतिबंध लगा दिया.

उसके बाद हाफिज़ सईद ने लश्करे तैबा का नया नाम जमात उद दावा रखा और फिर से सक्रिय हो गए. हालाँकि वे जमात उद दावा का लश्करे तैबा से कोई संबंध होने की बात से इनकार करते हैं.

वर्ष 2005 में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आए भयंकर भूकंप में जमात उद दावा ने पीड़ितों के लिए काफ़ी काम किया और उसी के कारण वह सेना के और क़रीब हो गई.

मुंबई हमला

भूकंप के बाद हाफिज़ सईद नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद फिर से ख़बरों में आए. भारत ने हमलों के लिए उनको ज़िम्मेदार बताया.

भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तानी सरकार ने 11 दिसंबर 2008 को हाफिज़ सईद को तब गिरफ्तार कर लिया जब संयुक्त राष्ट्र ने उनकी संस्था जमात उद दावा पर प्रतिबंध लगा दिया.

पाकिस्तान में भी जमात उद वादा पर प्रतिबंध है लेकिन वह कल्याणकारी कामों के साथ साथ जेहाद के लिए पैसा भी जुटा रही है और उसके प्रमुख हाफिज़ सईद खुले आम जेहाद के लिए लोगों को प्रोत्साहित भी करते रहते हैं.

अमरीका की ओर से इनाम की घोषणा के बाद हाफिज़ सईद की स्वतंत्र गतिविधियाँ पाकिस्तान सरकार को मुश्किल में डाल सकती हैं.

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