'यह भारतीय प्रोपगैंडा का असर है'

  • 3 अप्रैल 2012
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Image caption मक्की जमात-उद-दावा के दूसरे सबसे बड़े नेता हैं

अमरीका ने जिन पाकिस्तानी नागिरकों की गिरफ़्तारी में मदद के लिए भारी इनाम की घोषणा की है उनमें अब्दुल रहमान मक्की भी शामिल हैं.

मक्की पर 20 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया गया है, वे जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफ़िज़ सईद के नज़दीकी रिश्तेदार और संस्था के उप-प्रमुख हैं.

उनका कहना है कि अमरीका का फ़ैसला पूरी तरह से ग़लत है और इससे "पूरी दुनिया में अमरीका का चेहरा दाग़दार हुआ है."

बीबीसी के संवाददाता ज़ुल्फ़िकार अली के साथ बातचीत में मक्की ने कहा, "अमरीकी फ़ैसले का कोई औचित्य नहीं है, हम कोई जंगलों-गुफाओं में नहीं हैं, हम पाकिस्तान में पूरी तरह सक्रिय हैं, देश की जनता के साथ हमारा सीधा संबंध है, अमरीका इस समय भारी बौखलाहट का शिकार है इसलिए ऐसी बातें कर रहा है."

मक्की का मानना है कि यह घोषणा भारत के दबाव में की गई है, इस्लामाबाद से टेलीफ़ोन पर दिए गए इंटरव्यू में मक्की ने कहा, "अमरीका भारत के कुप्रचार से बुरी तरह प्रभावित है, भारत जो भी कहता है अमरीका आँख मूँदकर उसकी बात मान लेता है, इसके पीछे भारत के प्रोपगैंडा के सिवा और कुछ नहीं है."

वे इन आरोपों से इनकार करते हैं कि हाफ़िज़ सईद, उनका संगठन या ख़ुद मक्की किसी आतंकवादी गतिविधि में शामिल रहे हैं, उन्होंने कहा, "हमारा अमरीका या किसी दूसरे देश से कोई बैर नहीं है, हम पाकिस्तान के भीतर अपने देश की सुरक्षा के लिए जनता की आवाज़ को बुलंद करते हैं."

मुंबई हमले

जब उनसे कहा गया कि अमरीका ने मुंबई के हमलों में जमात-उद-दावा की भूमिका को इनाम घोषित किए जाने की वजह बताया है तो मक्की ने कहा, "मुंबई हमलों के मामले में लाहौर हाइकोर्ट की फुल बेंच ने अपना फ़ैसला दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि इस मामले में हाफ़िज़ सईद के शामिल होने के कोई सबूत पेश नहीं किए गए. हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया और सईद साहब को क्लिन चिट दी."

उनका कहना है कि अमरीकी फ़ैसले की मुख्य वजह ये है कि जमात-उद-दावा दिफ़ा-ए-पाकिस्तान काउंसिल के पीछे एक बड़ी ताक़त है, दिफ़ा-ए-पाकिस्तान काउंसिल पाकिस्तान के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान में नैटो को सैन्य आपूर्ति करने का विरोध करती है.

मक्की ने कहा, "नैटो को पाकिस्तान से होने वाली सप्लाई देश की संप्रभुता, एकता और सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है, हम उसके ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहे हैं जिसमें हर रोज़ लाखों लाख पाकिस्तान सड़कों पर उतर रहे हैं, यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक क़दम है, हम अपने देश की जनता के साथ मिलकर यह आवाज़ बुलंद कर रहे हैं कि हमारी सरकार नैटो के फ़ायदे के लिए अपने देश के हितों के ख़िलाफ़ काम न करे."

उनका कहना है कि उनकी गतिविधियों पर इनामों की घोषणा का असर तभी पड़ेगा जब पाकिस्तान की सरकार अपनी ओर से कोई क़दम उठाए, वे कहते हैं, "पाकिस्तान एक आज़ाद देश है, वहाँ इंसाफ़ के हक़ में काम करने वाली न्यायपालिका है, अगर हमें निशाना बनाया गया तो हम अदालत का दरवाज़ा खटखटाएँगे और उससे सुरक्षा माँगेंगे."

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