कश्मीर हिमस्खलन में मृतकों की संख्या 135 होने की आशंका

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पाकिस्तानी सेना ने आशंका जताई है कि कश्मीर में आए हिमस्खलन में मरने वालों की संख्या 135 तक पहुँच गई है. अभी तक लापता सैनिकों में से किसी के साथ कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अथर अब्बास ने बीबीसी को बताया कि 124 पाकिस्तानी सैनिक और 11 नागरिक लापता हैं.

शनिवार को सियाचिन ग्लेशियर के पास एक सैन्य अड्डा 70 फुट बर्फ की चपेट में आ गया था.

पहले कहा गया था कि 100 पाकिस्तानी सैनिक और 11 नागरिक लापता हैं. बचाव दल को अभी तक कोई भी जिंदा व्यक्ति नहीं मिला है.

मेजर जनरल अथर अब्बास ने बताया है कि हिमस्खलन ने एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था.

बचाव कार्य में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी, हेलिकॉप्टरों और विशेष कुत्तों का सहारा लिया जा रहा है. बर्फ को खोदने की कोशिश की जा रही है लेकिन बर्फ की परत काफी गहरी है.

सैन्य अड्डा कश्मीर में भारत सीमा के पास गयारी जिले में समुद्र तल से 15 हजार फुट की ऊँचाई पर है.

सबसे ऊँचा जंग का मैदान

जब शनिवार सुबह हिमस्खलन आया था तो मेजर जनरल अथर अब्बास ने बताया था कि ये काफी बड़ा है और कहना मुश्किल है कि कितने लोग जिंदा बचे हैं.

उन्होंने आगाह किया है कि बचाव कार्य पूरा होने में कई दिन लग सकते हैं. इस जगह तापमान शून्य से 70 डिग्री नीचे तक चला जाता है.

सैनिक नॉर्दन लाइट इंफेन्ट्री रेजीमेंट के थे जिन्हें पहाड़ों पर अभियान में ट्रेनिंग दी जाती है.

कश्मीर के इस इलाके में हिमस्खलन आते रहे हैं. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने बताया है कि आमतौर पर हिमस्खलन ज्यादा ऊँचाई वाले अड्डो पर आते रहे हैं जहाँ कम सैनिक रहते हैं.

2010 में यहाँ आए हिमस्खलन में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. 1947 में बंटवारे के बाद कश्मीर भारत और पाकिस्तान में बट गया था.

सियाचिन ग्लेशियर को विश्व के सबसे ऊँचे जंग के मैदान के तौर पर जाना जाता है. यहाँ 22 हजार फीट की ऊँचाई पर भी सैनिक तैनात हैं.

लेकिन लड़ाई की बजाए खराब मौसम और ठंड के कारण ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं.

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