पाकिस्तान के सिंध में बढ़ता टकराव

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Image caption बंद और हिंसा के चलते कराची के सिंधी बहुल इलाकों में व्यापार पर विपरीत असर पड़ा है.

<span >सिंध प्रांत में एक बार फिर अलगाववादी आंदोलन में तेज़ी आ गई है और पाकिस्तान विरोधी भावनाएँ भी बढ़ गई हैं.

<span >अलगाववादी नेता बशीर खार कुरैशी छह अप्रैल को अचानक बीमार पड़ गए थे और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

<span >वे जिये सिंध कौमी महाज यानी जिये सिंध राष्ट्रीय मोर्चा के अध्यक्ष थे, जो सिंध प्रांत को पाकिस्तान से अलग करने के लिए अहिंसक संघर्ष कर रहे थे.

<span >जिये सिंध कौमी महाज का कहना है कि उनको जहर दे कर मारा गया है जबकि डॉक्टरों के मुताबिक उनकी मौत ह्रदय रोग के कारण हो गई थी लेकिन पोस्ट मार्टरम की रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है.

<span >जिये सिंध कौमी महाज ने बुधवार को बशीर खान कुरैशी की कथित हत्या के खिलाफ सिंध प्रांत में बंद का आह्वान किया था और पूरे प्रांत में जन जीवन अस्त-व्यस्त रहा.

<span >कराची के सिंधी बहुल इलाकों, हैदारबाद, नवादशाह, लाड़काना, शिकारपुर और घोटकी सहित प्रांत के छोटे बड़े शहरों में व्यापार पूरे तरीके से ठप रहा और यातायात सड़कों से बिल्कुल गायब था.

<span >हिंसा और बंद

<span >बंद के दौरान सिंध के कई शहरों में भीषण गोलीबारी की गई और कुछ शहरों में वाहनों को आग भी लगा दी गई.

<span >पुलिस ने सखर, नवाबशाह, हैदराबाद, खैरपुर सहित अन्य जिलों से 12 के करीब लोगों को दंगा करने का आरोप में हिरासत में भी लिया.

<span >ग़ौरतलब है कि सिंध कौमी महाज की स्थापना वर्ष 1972 में की गई थी और इसका उद्देश्य सिंध प्रांत को पाकिस्तान से अलग करना और नए देश सिंधुदेश की स्थापना करना है.

<span >यह संस्था सिंध ग्रामीण इलाकों और विश्वविद्यालों में पढ़ने वाले छात्रों सहित युवाओं में काफी लोकप्रिय है.

<span >जिये सिंध कौमी महाज का मानना है कि पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठानों में बैठे लोग सिंधियों को अधिकार नहीं दे रहे हैं.

<span >सिंध पाकिस्तान का सबसे धनी प्रांत है और देश के राजस्व का 70 प्रतिशत सिंध से हासिल होता है लेकिन सिंधियों का उस पर कोई अधिकार नहीं है.

<span >इसके लिए जिये सिंध कौमी महाज पाकिस्तानी सेना और पंजाब प्रांत पर आरोप लगाती है लेकिन सेना का कहना है कि पाकिस्तान के दुश्मन देश जिये सिंध कौमी महाज का समर्थन करते हैं, जिसमें भारत का भी नाम लिया जाता है.

<span >कुछ दिन पहले बशीर खान कुरैशी के नेतृत्व में सिंध की आजादी के लिए कराची में एक बड़ी रैली निकाली गई थी, जिसमें हज़ारों लोगों ने भाग लिया था.

<span >उस रैली में पाकिस्तान विरोधी और सिंध की आजादी के लिए नारे लगाए गए थे, जिसकी इस्लामाबाद में कड़ी आलोचना हुई थी.

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