गिलानी को फिर अदालत में पेश होने का आदेश

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Image caption प्रधानमंत्री पर आरोप हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति के खिलाफ स्विस अधिकारियों को पत्र न लिख कर अदालत की अवमानना की है.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की अवमानना के मामले में एक बार फिर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है.

जस्टिस नासिरुल मुल्क की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई कर रहा है.

प्रधानमंत्री पर आरोप हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मामले खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र कर न लिख अदालत की अवमानना की है.

लेकिन गिलानी कई बार कह चुके हैं कि आसिफ अली ज़रदारी जब तक राष्ट्रपति पद पर हैं, तब तक उनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.

अदालत ने मंगलवार को अदालत की अवमानना के मामले में फैसले सुरक्षित करते हुए 26 अप्रैल को फैसला सुनाने की घोषणा की है और उसी दिन प्रधानमंत्री को अदालत में पेश में होना का आदेश दिया.

'सबूत नहीं मिला'

अभियोजन पक्ष के वकील और अटॉर्नी जनरल इरफान कादिर ने अदालत को बताया कि इस मुकदमे में प्रधानमंत्री गिलानी के खिलाफ अदालत की अवमानना का कोई सबूत नहीं मिला है.

उन्होंने बताया, "इस समय पाकिस्तान में अदालत की अवमानना का कोई कानून नहीं है और 2003 वाला अदालत की अवमानना का अध्यादेश अब खत्म हो चुका है, इस लिए प्रधानमंत्री के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई किसी कानून के तहत नहीं की जा रही है."

उन्होंने आगे कहा कि इस मुकदमे में प्रधानमंत्री के खिलाफ दर्ज की गई चार्जशीट निराधार है और अदालत सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखने के लिए आदेश नहीं दे सकती है.

इरफान कादिर ने कोर्ट को बताया कि अदालती आदेश पर अमल करवाने के लिए अदालत की अवमानना का नोटिस देना सही प्रक्रिया नहीं है.

इस पर अदालत ने कहा कि उसे किसी को सजा देने का शौक नहीं है लेकिन अदालत को अपने फैसलों पर अमल करवाने के लिए कोई दूसरा रास्ता तो बताया जाए.

प्रधानमंत्री पर आरोप

अदालत ने सुनवाई गुरुवार तक स्थागित कर दी और उसी दिन फैसला सुनाने की घोषणा की.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने दो फ़रवरी को अदालत की अवमानना करने के आरोप में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी पर अभियोग शुरू करने का फ़ैसला लिया था.

गिलानी पर आरोप है कि उन्होंने ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए स्विस अधिकारियों से आग्रह न करके अदालत की अवमानना की है.

प्रधानमंत्री गिलानी ने स्विटरज़रलैंड से राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के एक मामले की दोबारा जांच शुरू करने का आवेदन नहीं किया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी.

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और उनकी दिवंगत पत्नी व पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो को साल 2003 में स्विटज़रलैंड की एक अदालत ने करोड़ो डॉलर की हेराफेरी का दोषी पाया था.

ये मामला उस समय का था जब बेनज़ीर भुट्टो सत्ता में थीं.

वर्ष 2008 में बेनज़ीर भुट्टो के ख़िलाफ़ बहुत से मामले बंद कर दिए गए थे, जिसकी वजह से वे चुनावों में भाग लेने के लिए पाकिस्तान आ पाई थीं.

इसके कुछ समय बाद ही उनकी हत्या हो गई थी.लेकिन वर्ष 2009 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को बंद करने के आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया था.

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