अवमानना के मामले में आज फैसला संभव

  • 26 अप्रैल 2012
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Image caption गिलानी अदालत की अवमानना के मामले में तीसरी बार अदालत में पेश होंगे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी अदालत की अवमानना का मामले में तीसरी बार गुरुवार को अदालत में पेश होने जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चल रहा है और अदालत ने मंगलवार को घोषणा की थी कि वह 26 अप्रैल यानी गुरुवार को फैसला सुनाएगी.

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की कार्रवाई अंतिम रुप तक पहुँचती दिख रही है.

इसे पहले जुल्फिकार अली भुट्टो और नवाज शरीफ के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले दर्ज हो चुके हैं लेकिन उन दोनों के खिलाफ अभियोग लागू नहीं किया गया था.

जस्टिस नासिरुल मुल्क की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने कुछ दिन पहले इस मामले में फैसले सुरक्षित करते हुए 26 अप्रैल को फैसला सुनाने की घोषणा की थी और उसी दिन प्रधानमंत्री को अदालत में पेश में होने का आदेश दिया था.

प्रधानमंत्री ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बताया था कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और तीसरी बार अदालत में पेश होंगे.

आरोप

उन पर आरोप हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मामले खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र कर न लिख अदालत की अवमानना की है.

लेकिन गिलानी कई बार कह चुके हैं कि आसिफ अली जरदारी जब तक राष्ट्रपति पद पर हैं, तब तक उनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.

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Image caption सुप्रीम कोर्ट में पहली बार किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ अवमानना के मामले मे फैसला सुनाया जाएगा

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने दो फरवरी को अदालत की अवमानना करने के आरोप में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी पर अभियोग शुरू करने का फैसला लिया था.

गिलानी पर आरोप है कि उन्होंने जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए स्विस अधिकारियों से आग्रह न करके अदालत की अवमानना की है.

प्रधानमंत्री गिलानी ने स्विटरजरलैंड से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले की दोबारा जांच शुरू करने का आवेदन नहीं किया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी.

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और उनकी दिवंगत पत्नी व पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को साल 2003 में स्विटजरलैंड की एक अदालत ने करोड़ो डॉलर की हेराफेरी का दोषी पाया था.

ये मामला उस समय का था जब बेनजीर भुट्टो सत्ता में थीं.

वर्ष 2008 में बेनजीर भुट्टो के खिलाफ बहुत से मामले बंद कर दिए गए थे, जिसकी वजह से वे चुनावों में भाग लेने के लिए पाकिस्तान आ पाई थीं.

इसके कुछ समय बाद ही उनकी हत्या हो गई थी. लेकिन वर्ष 2009 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को बंद करने के आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया था.

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