ओसामा के बाद की दहशत और गुस्सा

ओसामा
Image caption ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन का घर ढहाए जाने के बाद वहां बच्चे क्रिकेट खेलते है.

अल कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत को एक साल बीत चुका है लेकिन ऐबटाबाद शहर उस घटना की दहशत से निकल नहीं सका है.

दो मई 2011 को रात करीब दो से तीन बजे के बीच अमरीकी सैनिक हैलिकॉप्टर द्वारा ऐबटाबाद पहुँचे और गुप्त कार्रवाई कर ओसामा बिन लादेन को मार दिया.

यह घटना ऐबटाबाद शहर में पाकिस्तानी सेना के सबसे बड़े प्रशिक्षण केंद्र काकूल एकैडमी के सटे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले इलाके बिलाल टाउन के एक बड़े से घर में घटी.

घटना के करीब दस महीनों बाद सरकार ने उस घर को घिराने का फैसला लिया और स्थानीय प्रशासन ने रात के अंधेरे में घर को गिरा दिया और उसका मलबा भी साफ करवा दिया.

ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद का ऐबटाबाद शहर देखने के लिए मैं सीधा बिलाल टाउन गया, जहाँ कभी ओसामा बिना लादेन आराम से जीवन बिता रहे थे.

जिस जगह पर ओसामा बिन लादेन का घर था, अब वो एक ईंटों और पत्थरों का ढेर बना हुआ है. पड़ोस के बच्चों के खेलने के लिए कोई खाली मैदान नहीं था तो बच्चे अब उसी जगह पर क्रिकेट खेलते हैं.

'विदेशी पत्रकार न आए'

जब घर अपनी असल स्थिति में था तो उसी की चारों ओर पुलिसकर्मी तैनात रहते थे लेकिन अब एक भी पुलिसकर्मी नहीं है.

मेरे अलावा कुछ अन्य पत्रकार भी इस्लामाबाद से ओसामा के घर को देखने पहुँचे थे. थोड़ी ही देर में कुछ पुलिसकर्मी आए और पत्रकारों का परिचय पूछने लगे.

एक पुलिसकर्मी से जब मैंने पूछा कि इतनी पूछताछ क्यों हो रही है, अब तो ओसामा बिन लादेन को अमरीकी सैनिकों ने मार दिया, तो उन्होंने कहा कि वो ये देखने आए हैं कि कोई विदेशी पत्रकार इस जगह पर न आए.

पुलिस ने पत्रकारों से नाम पूछने के सिवा कुछ नहीं कहा लेकिन उन्होंने अपना गुस्सा बच्चों पर उतार दिया और उनको वहाँ से भगा दिया.

पुलिस की उपस्थिति में किसी भी स्थानीय व्यक्ति ने बात करने से इनकार कर दिया लेकिन जब पुलिस वहाँ से चली गई तो मैंने कुछ लोगों से बात की.

स्थानीय लोग काफी डरे हुए थे लेकिन उनमें अमरीका के प्रति गुस्सा भी बहुत था.

'अमरीकी चाल'

मैंने एक व्यक्ति खालिद से पूछा कि उस घटना के कारण उसके जीवन पर क्या असर पड़ा है तो उन्होंने कहा, ''मैं नहीं मानता कि ओसामा इधर था, यह अमरीका की चाल है और पाकिस्तान में तो ओसामा हो ही नहीं सकता. अगर वह यहाँ था तो टीवी पर उसकी लाश को क्यों नहीं दिखाया.''

खालिद के पड़ोसी जाहिद का कहना है कि अमरीका ने खुफिया कार्रवाई कर ओसामा बिन लादेन को मार दिया और अगर पता होता तो वो अपनी जान भी कुर्बान कर देता.

वह कहते हैं कि अमरीकी सैनिकों की कार्रवाई की वजह से पाकिस्तान खासकर ऐबटाबाद काफी बदनाम हुआ और आम लोगों में डर पैदा हुआ है.

वहीं मौजूद एक अन्य व्यक्ति सलाहुद्दीन कहते हैं, ''जब ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में था तो अमरीका ने अफगानिस्तान में क्यों हमले किए और सैंकड़ों निर्दोश लोगों को क्यों मारा.''

वे मानते हैं कि अमरीका का एकमात्र एजेंडा मुसलमानों को खत्म करना हैं.

गुस्सा और डर

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Image caption ओसामा बिन लादेन को अमरीकी सैनिकों ने ऐबटाबाद में पिछले साल मार दिया था.

स्थानीय लोगों का अमरीका के प्रति जितना गुस्सा है उससे ज्यादा डर है कि कहीं उनके पड़ोस में और भी चरमपंथी न रह रहे हो जिससे उनका जीवन फिर से प्रभावित हो.

ऐबटाबाद के निवासी और बीबीसी के पूर्व संवाददाता अली अहमद खान इस बारे में कहते हैं, ''ओसामा बिन लादेन की मौत की घटना ज़रुर याद आती है, अगर ऐसा हुआ है तो फिर से भी हो सकता है और मन में यह भी विचार आता है कि अशांत इलाकों से दूर होने के बावजूद भी हम कितने असुरक्षित हैं.''

वह कहते हैं कि इतने बड़े चरमपंथी की मौजूदगी से ऐबटाबाद के आम लोगों के मन में काफी डर पैदा कर दिया और अब तो लोग इस पर बात भी नहीं करना चाहते हैं.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने ओसामा बिन लादेन के घर को गिरा दिया और शायद वह सोच रहे हैं कि इससे लोग दो मई की घटना को भूल जाएँगे.

घटना को लेकर आम लोगों के मन में बैठा डर धीरे धीरे जरुर कम होगा लेकिन पाकिस्तान के इतिहास में ओसामा बिन लादेन का नाम हमेशा के लिए जुड़ गया है.

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