ऐबटाबाद हमले से देश अपमानितः पाक मीडिया

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Image caption ऐबटाबाद के इसी घर में ओसामा बिन लादेन मारे गए थे

पाकिस्तान मीडिया ने ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की पहली बरसी पर अमरीका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. कई अखबारों ने लिखा है कि यह ‘देश के लिए अपमानजनक’ और ‘आंतरिक स्वाभिमान का पतन’ है.

पिछले साल दो मई को अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को ऐबटाबाद में अमरीकी सैनिकों ने कार्रवाई में मार दिया था. अंग्रेजी और उर्दू अखबारों में लिखे गए विभिन्न टिप्पणीकारों ने उस सैन्य कार्रवाई को ‘अमरीका के धोखाधड़ी का अकल्पनीय कथा’ बताया है.

एक अखबार ने लिखा है कि इससे हमारा ‘मन कसैला’ हो गया और अमरीका ने पाकिस्तान के घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है.

ब्रॉडकास्ट मीडिया ने इसे 9/11 की तरह की घटना बताया है और कहा है कि बिन लादेन को मारे जाने का ऑपरेशन ‘पाकिस्तान को अपमानित करने के लिए’ किया गया था.

आइए नजर डालते हैं विभिन्न अंग्रेजी-उर्दू अखबारों पर, जिन्होंने इस मामले पर अपनी राय रखी है.

एकता अखंडता पर हमला

उर्दू अखबार मशरिक ने लिखा है- वास्तव में ऐबटाबाद का ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे लिए सबसे अपमानजनक घटना है. बिन लादेन और अल-कायदा निश्चित रूप से अतीत में खतरनाक औऱ रहस्यमय रहे हैं, लेकिन यह कहना आज भी संभव नहीं है कि ऐसे चरित्र के लोग अब नहीं बचे हैं और ऐबटाबाद जैसी घटनाओं की पुनरावृति नहीं होगी.

एक्सप्रेस ट्रिव्यून ने अपने संपादकीय में लिखा है- पाकिस्तान के पास अन्य कई महत्वपूर्ण मसले हैं, जिनका समाधान तत्काल निकालने की जरूरत है. लेकिन जिस वास्तविक समस्या को पूरी दुनिया देखती है और जिसे ज्यादातर पाकिस्तानी अनदेखी कर जाते हैं, वह आंतकवाद है. आंतरिक संप्रभुता के खत्म होने के अलावा जो चीज हमारे सामने मुंह बाए खड़ी है, वह है मृत ओसामा बिन लादेन की शख्सियत, जो देश की बची-खुची संप्रभुता को भी खत्म किए जा रही है.

एसएम हाली ने अंग्रेजी अखबार द नेशन में लिखा है- ऑपरेशन जेरोनिमो की पहली वर्षगांठ सभी पाकिस्तानियों को, सरकार को, सेना और सुरक्षा एंजेंसियों को याद रखना चाहिए. एक तरफ अमरीका का गृह मंत्रालय, पेंटागन और सीआईए साथ मिलकर काम कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी हुकूमत के हर तरह की मदद के बाद भी उसकी इसलिए आलोचना हो रही है कि उसने कुछ नहीं किया.

संप्रभुता पर हमला

उर्दू अखबार औसफ में तारिक इस्माइल सगीर ने लिखा है- ओसामा बिन लादेन को मारने की घटना पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला है.

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Image caption बराक ओबामा और उनके सहयोगी पाकिस्तान के ऐबटाबाद में चल रहे सैन्य कार्यवाई पर नजर रखे हुए हैं.

वकास अहमद ने उर्दू अखबार जंग में अमरीका पर सवाल करते हुए पूछा है- जो लोग ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में होने पर प्रश्न पूछ रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत को देखना चाहिए. वो कमियाँ क्या थी और किसने लोगों में गहतफहमी पैदा की.

पाकिस्तान ऑब्जर्वर में आलमगिरियन ने लिखा है- अमरीका का सबसे प्रमुख सहयोगी होने के कारण पाकिस्तान को सबसे ज्यादा आत्मघाती हमले, आतंकवादी हमले जैसे बहुत सारी घटनाओं का सामना करना पड़ा है और इससे वहां के लोगों की जिंदगी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्ता भी प्रभावित हुई है, तब भी लोग पाकिस्तान पर ही शक करते हैं.

नगमा हबीब ने दो मई को जंग में लिखा है- शायद 9/11 की घटना से पहले ओसामा बिन लादेन को कोई नहीं जानता था, इसलिए अमरीका अपनी गलती के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहरा रहा है. अमरीका ऐबटाबाद में ओसामा के होने पर हाय-तौबा मचा रहा है जबकि हकीकत यह है कि यह आईएसआई ही है, जिसकी मदद से अल कायदा के अनेक नेताओं को अमरीका ने पकड़ा है.

उर्दू अखबार जिन्नाह में खालिद नवाज ने लिखा है- अगर ऐबटाबाद की कार्रवाई से अमरीकी प्रशासन की लोकप्रियता बढ़ी है तो यह भी हो सकता है कि इससे अमरीकी राष्ट्रपति दूसरी बार चुनाव भी हार सकते हैं. अमरीका अफगानिस्तान से बाहर निकलना चाहता है लेकिन दूसरी तरफ अपनी हार को पाकिस्तान पर थोपना चाहता है, जो हमें बिल्कुल मंजूर नहीं है.

मोहीउद्दीन बिन अहमद दीन ने उर्दू अखबार औसफ में दो मई को लिखा है- अमरीका की यह गोपनीय व्यवस्था छल और धोखे पर टिका हुई थी. जिस किसी ने भी अमरीका के उस हमले का समर्थन किया, सभी ने पाकिस्तान के हित के खिलाफ काम किया है.

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