जवाहिरी पर क्लिंटन: पाक प्रेस गरम भी, नरम भी

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Image caption पाकिस्तान मीडिया ने अमरीका से जवाहिरी के बारे में जानकारी साझा करने को कहा है.

पाकिस्तानी अखबारों ने अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के भारत में दिए इस बयान पर मिली जुली प्रतिक्रिया दी है कि ओसामा बिन लादेन के बाद अल कायदा की कमान संभालने वाले अयमन अल-जवाहिरी पाकिस्तान में हैं.

पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार जहां अमरीका से जवाहिरी की मौजूदगी के बारे में उपलब्ध जानकारी को पाकिस्तान के साथ साझा करने पर जोर दो रहे हैं, वहीं उर्दू अखबार क्लिंटन के बयान को बेबुनियाद बता रहे हैं.

क्लिंटन ने सोमवार को कोलकाता दौरे में कहा कि अमरीका मानता है कि जवाहिरी संभवत: पाकिस्तान में मौजूद हैं जबकि पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने कहा था कि अगर अमरीका के पास इस बारे में कोई जानकारी है तो वह पाकिस्तान से साझा करे.

अंग्रेजी अखबार

पाकिस्तान सरकार की नीति के आलोचक और पेशावर से छपने वाले अखबार फ्रंटियर पोस्ट ने लिखा है, “क्लिंटन के बयान को कोरी कल्पना और अटकलबाजी बता कर खारिज करने की बजाय इस्लामाबाद की सरकार को वॉशिंगटन की सरकार से उस जानकारी को साझा करने पर जोर देना चाहिए जिसके आधार पर उन्होंने जवाहिरी के पाकिस्तान में होने की बात कही है. भरोसा दोनों तरफ से कायम होता है. उन्होंने एबटाबाद की घटना पर पाकिस्तान को बेखबर रख कर धोखा दिया है. उन्हें फिर धोखा नहीं देना चाहिए.”

कराची स्थित उदारवादी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है, “विदेश विभाग दुनिया का ऐसा इकलौता संस्थान होगा जो इस बात से अंजान है कि अल कायदा और उसके सहयोगी पाकिस्तान को अपने छिपने के ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इस बारे में इनकार करते रहने की बजाय हम इस बात को मानें कि हमारे बीच आतंकवादी हो सकते हैं और फिर अमरीका को बताएं कि उन्हें तलाशना कैसे घास के ढेर में सूई ढूंढने जैसा काम है.”

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Image caption क्लिंटन ने भारत दौरे में पाकिस्तान में जवाहिरी की मौजूदगी का बयान दिया है.

इस्लामाबाद से छपने वाले मध्यमार्गी अखबार द न्यूज ने कहा है, “पुरानी कहानियां, पुरानी कथाएं- कभी कभी उन्हें नया मोड़ दे दिया जाता है. बार बार ऐसा होता है.. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब ओसामा वाला प्रकरण हुआ तो हमें बड़ा झटका दिया गया. हम इस तरह की शर्मिंदगी दोबारा नहीं उठा सकते, इसीलिए हमें अल-जवाहिरी और इस तरह के दूसरे उग्रवादियों के बारे में खुफिया जानकारी को जुटाना होगा और इस बात को सुनिश्चित करना होगा अगर अमरीका फिर ऐसे कदम उठाता है तो हम हक्के बक्के न रह जाएं.”

वाम-उदारवादी रुझान रखने वाले कराची के अखबार डॉन का कहना है, “अगर इस्लामाबाद ये कहता है कि अयमन अल-जवाहिरी पाकिस्तान में नहीं है या वो क्लिंटन के बयान को कोरी कल्पना मानकर खारिज करता है और दुनिया इसे शक की निगाह से देखे, तो किसी को हैरानी नहीं होगी. पाकिस्तानी खुफिया विभाग की मदद से अल कायदा के सदस्यों की पकड़ा गया है. ऐसे में पाकिस्तान में अल-जवाहिरी की मौजूदगी के आरोपों को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है. अगर अमरीका के पास इस बारे में कोई जानकारी है तो वो अटकलों पर आधारित बयानबाजी किए बिना इसे पाकिस्तान से साझा करे.”

लाहौर से प्रकाशित होने वाले रूढिवादी राष्ट्रवादी अखबार पाकिस्तान टुडे का कहना है, “बहुत सी घटनाएं इस बात को पुख्ता करती हैं कि उत्तरी वजीरिस्तान का इलाका आंतकवादी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया है जिन्हें पाकिस्तान के भीतर और बाहर विदेशों में अंजाम दिया जा रहा है. सरकार को देर सवेर यह बात समझनी चाहिए कि अच्छा आतंकवादी मृत आतंकवादी है.”

राजधानी इस्लामाबाद से प्रकाशित और सेना समर्थक माने जाने वाला पाकिस्तान ऑब्जर्वर लिखता है, “चाहे जो हो, अमरीकी विदेश मंत्री की टिप्पणियां अमरीकियों की सोच के बारे में साफ इशारा करती हैं और इनका मतबल है कि फिर एक बार ऐबटाबाद जैसी कार्रवाई संभव है. पाकिस्तान को पूरी गंभीरता के साथ अमरीकियों के सामने ये मुद्दा उठाना होगा और फिर से किसी अमरीकी कार्रवाई की सूरत में अपनी संप्रभुता की सुरक्षा के उपाय करने होंगे. ”

उर्दू अखबार

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Image caption पाकिस्तान की विदेश मंत्री खर ने अमरीका से पुख्ता जानकारी की मांग की है.

रावलपिंडी से छपने वाले रुढ़िवादी राष्ट्रवादी अखबार नवा-ए-वक्त का कहना है, “पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने इस बारे में बिल्कुल सही कहा है कि जवाहिरी के पाकिस्तान में होने के पुख्ता सबूत दिए जाने चाहिए और फिर पाकिस्तान उस पर कदम उठाएगा. ऐसा लगता है कि हिलेरी ने पाकिस्तान पर यह आरोप सिर्फ भारत को खुश करने के लिए लगाया है.”

उर्दू के बड़े अखबारों में शामिल कराची से प्रकाशित होने वाले डेली एक्सप्रेस का कहना है, “हम उम्मीद करते हैं कि अमरीकी प्रशासन जल्दी इस बारे में स्पष्टीकरण जारी करेगा कि हिलेरी ने किस संदर्भ में पाकिस्तान में जवाहिरी की मौजूदगी के बारे में बयान दिया है. ये जरूरी है क्योंकि जब अमरीका और पाकिस्तान के बीच हालात सुधर रहे हैं, तो ऐसे निर्थक बयानों से फिर स्थिति बिगड़नी नहीं चाहिए.”

कराची स्थिति ओसामा बिन लादेन के समर्थक रहे अखबार उम्मत का कहना है, “ड्रोन हमलों और वांछित लोगों के बारे में अमरीका का रुख फिर कड़ा हो गया है. अमरीका ने ड्रोन हमले बढ़ा दिए हैं और अब उसने दावा किया है कि जवाहिरी पाकिस्तान में मौजूद हैं. यह इस बात का साफ संकेत है कि अमरीका निकट भविष्य में फिर एबटाबाद जैसे अभियान को अंजाम देने के मूड में है.”

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