अमरीकी संसद में पाक आतंकवाद पर बिल पेश

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Image caption विधेयक कैलिफोर्निया से सांसद और संसद की विदेश मामलों की एक उपसमिति के अध्यक्ष ने पेश किया

अमरीकी संसद में पाकिस्तान के बारे में एक बिल पेश किया गया है जिसमें वहाँ आईएसआई की गतिविधियों के परिणामस्वरूप हर अमरीकी के मारे जाने के बदले में पाकिस्तान की दी जानेवाली सहायता में कटौती करने का प्रस्ताव किया गया है.

"पाकिस्तान आतंकवाद जवाबदेही कानून" नामक इस विधेयक को एक अमरीकी सांसद डेना रोअरबाकर ने पेश किया.

इसमें सुझाया गया है कि पाकिस्तान में प्रत्येक अमरीकी नागरिक के मारे जाने के बाद उसे मिलनेवाली अमरीकी सहायता में पाँच करोड़ डॉलर की कटौती की जानी चाहिए और इस राशि को प्रभावित व्यक्ति के परिवार को दे दिया जाना चाहिए.

इस कानून के तहत अमरीकी रक्षा मंत्रालय को ऐसे सभी अमरीकी लोगों की सूची बनाने के लिए कहा जाएगा जो कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सक्रिय ऐसे चरमपंथी गुटों के हाथों मारे गए जिन्हें पाकिस्तानी तंत्र से सहायता मिलती है.

अमरीकी राज्य कैलिफोर्निया से सांसद रोअरबाकर अमरीकी कांग्रेस की विदेश मामलों की एक उपसमिति के अध्यक्ष हैं.

आरोप

उन्होंने कहा है,"अमरीका ने काफी समय से पाकिस्तान सरकार को धन दिया है जबकि आईएसआई और पाकिस्तानी सेना ऐसे इस्लामी गुटों को चला रहे हैं जो अमरीकी लोगों की हत्या कर रहे हैं. अमरीका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा."

उन्होंने कहा,"पाकिस्तान कई दशकों से भारत और अफगानिस्तान में हमले करने के लिए चरमपंथी गुटों को समर्थन देता रहा है."

अमरीकी सांसद ने कहा कि पाकिस्तान ने तालिबान के गठन में मदद की और आईएसआई ने ओसामा बिन लादेन को वर्षों तक अमरीका से छुपाए रखा.

रोअरबाकर ने कहा,"आज अमरीकी सैनिकों को मारनेवाला एक बेहद खतरनाक गुट है हक्कानी नेटवर्क, जिसे पाकिस्तानी सरकार चला रही है."

अमरीकी सांसद के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि कि अमरीकी सेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल माइक मलेन ने भी कहा है कि सितंबर 2011 में काबुल में उनके दूतावास पर हमले के लिए आईएसआई ने हक्कानी नेटवर्क को निर्देश दिया था.

बयान के अनुसार एडमिरल मलेन ने ये भी कहा था कि उनके पास इस बात के भी पुख्ता सबूत हैं कि 28 जून को काबुल में इंटर कॉन्टिनेन्टल होटल पर हुए हमले में भी आईएसआई का हाथ था.

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