कराची: डकैतियों में चरमपंथियों का भी हाथ

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Image caption पुलिस दस्तावेज़ों के मुताबिक कराची में पिछले सालों में ढाई अरब रुपय की बैंक डकैतियाँ हुई हैं.

पिछले तीन वर्षों में पाकिस्तान के कराची शहर में डकैतियों में करीब ढाई सौ करोड़ रुपयों की लूट हुई है. एक पुलिस अधिकारी के अनुसार इनमें से अधिकतर डकैतियों को चरमपंथी गुटों ने अंजाम दिया है.

पाकिस्तान में एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि कराची में ज्यादातर डकैतियाँ चरमपंथी संगठन अपने लिए पैसा जुटाने के लिए करवाते हैं.

कराची पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुर्रम वारिस ने बीबीसी को बताया कि पिछले तीन सालों के दौरान बैंक डकैतियों के लिए जरिए लूटी गई ढाई अरब रुपए से ज्यादा की रकम का अधिकतर हिस्सा चरमपंथी संगठनों के लिए हासिल किया गया.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों का संबंध प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों से भी है, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान बैतुल्लाह महसूद गुट, जिंदुल्लाह गुट और इल्यास कश्मीरी का गुट शामिल है.

पौने दो करोड़ की आबादी वाले शहर कराची में डकैती की वारदातें होना सामान्य बात है.

पुलिस का कहना है कि बैंक डकैतियों के जरिए लूटी गई रकम को चरमपंथियों ने अपनी आमदनी की साधन बना लिया है जो कि चिंता का विषय है.

खुर्रम वारिस ने बताया कि पिछले दस सालों के आंकड़ों का आकलन किया जाए तो पहले इसमें प्रांत के डाकू के गुट लिप्त होते थे और बैंक डकैती को एक बड़ा अपराध माना जाता था.

आश्चर्यजनक बात

उन्होंने कहा, “इसके बाद अचानक ये देखने में आया कि कुछ ओर तत्व डकैती में लिप्त हो गए जिनमें चरमपंथी गुट भी शामिल थे और चरमपंथियों ने पैसे जुटाने के लिए बैंक डकैतियाँ करवाना शुरु कर दी.”

उनके मुताबिक पहली बार पुलिस को उस समय संदेह हुआ जब 16 के करीब लोगों ने एक बैंक को लूटा.

उन्होंने कहा, “हमारे लिए ये आश्चर्यजनक था कि डकैती में 16 लोग क्या कर रहे हैं. इसके बाद चंद संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया और जाँच से पता चला कि उनका संबंध चरमपंथी गुट से है और वह अपने गुट को पैसा भेजते हैं.”

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों का संबंध प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों से भी है, जिसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान बैतुल्लाह महसूद गुट, जिंदुल्लाह गुट और इल्यास कश्मीरी का ग्रुप शामिल है.

उन्होंने कहा कि सभी गुट बैंक डकैतियों के जरिए पैसा जुटा रहे हैं.

खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट

जब उनसे पूछा गया कि आजकल किस प्रकार की डकैतियाँ हो रही हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि पैसा जुटाने वाली डकैतियाँ ज्यादा हो रही हैं.

उनके मुताबिक चरमपंथी गुटों के पास लोगों की कोई कमी नहीं है और अगर उनमें से कुछ गिरफ्तार भी होते हैं तो उन्हें दूसरे लोग आसानी से मिल जाते हैं.

उन्होंने कहा कि पुलिस केंद्रीय बैंक के साथ मिल कर बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था को ओर कड़ा करने के लिए उचित कदम उठा रही है ताकि बैंक डकैतियों से बचा जा सके.

गौरतलब है कि कुछ समय पहले खुफिया एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट दी थी कि प्रतिबंधित चरमपंथी गुटों के खिलाफ जारी सैन्य अभिनाय की वजह से यह गुट काफी वित्तीय संकट का समना कर रहे हैं.

रिपोर्ट में बताया गया था कि कि चरमपंथी संगठनों ने वित्तीय संकट को खत्म करने के लिए आपराधी गुटों से संपर्क कर लिए हैं और बैंक डकैती और फिरौती के लिए अपहरण जैसे घटनाओं का सहारा ले लिया है.

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