ओसामा वाले डॉक्टर के मामले में नया मोड़

 बुधवार, 30 मई, 2012 को 18:04 IST तक के समाचार
डॉ शकील आफरीदी

माना जाता है कि डॉ. शकील आफरीदी ने ओसामा बिन लादेन को तलाश करने में अमरीका की मदद की थी

अल कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन को तलाश करने में अमरीका की मदद करने वाले पाकिस्तानी डॉक्टर डॉ शकील आफरीदी के मामले में नया मोड़ आ गया है.

कुछ दिन पहले खबरें आई थी कि पाकिस्तान की एक अदालत ने उन्हें देशद्रोह के मुदकमे में दोषी करार दिया था और अमरीका ने उस अदालती फैसले की कड़ी आलोचना की थी.

खैबर एजेंसी में स्थानीय प्रशासन के दस्तावेजों से पता चला है कि उन्हें अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए की मदद करने के आरोप में सजा नहीं हुई है बल्कि प्रतिबंधित चरमपंथी गुट को वित्तीय सहायता देने के लिए दोषी पाए जाने पर सजा हुई है.

दस्तावेजों के मुताबिक डॉ. शकील आफरीदी ने खैबर एजेंसी के प्रतिबंधित संगठन 'लश्करे इस्लाम' के प्रमुख मंगल बाग को 20 लाख रुपय दिए थे और उन्हें चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की थी.

सुरक्षा की चिंता

दस्तावेजों में यह भी बताया गया है कि कबायली इलाके खैबर एजेंसी में पाकिस्तानी सेना पर हुए हमलों की योजना डॉ. शकील आफरीदी के दफ्तर में बनाई जाती थी और साठ के अधिक हमलों की योजना बनाई गई थी.

ओसामा बिन लादेन

पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को अमरीकी फौज ने गत वर्ष मई में मार दिया था

उसे पहले स्थानीय प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया था कि डॉ. शकील आफरीदी को देशद्रोह के मुकदमे में 30 वर्षों की सजा सुनाई गई थी और तीन लाख 50 हजार रुपय का जुर्माना लगाया गया था.

लेकिन दस्तावेजों में डॉ. शकील आफरीदी को 33 साल कैद की सजा सुनाई गई है.

दूसरी ओर खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के मुख्यमंत्री अमीर हैदर होती ने डॉ. शकील आफरीदी को जेल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देने के निर्देश जारी किए हैं.

अधिकारियों के मुताबिक कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री को एक रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें बताया गया था कि डॉ. शकील आफरीदी को जेल के भीतर एक अलग कमरे में रखा गया है और उनकी सुरक्षा के लिए केवल दो पुलिसकर्मी तैनात हैं.

जबकि जेल में 250 से ज्यादा खतरनाक कैदी हैं जिनमें से ज्यादातर उनके खिलाफ हैं और इस बात का संदेह है कि वह उनको नुकसान पहुँचा सकते हैं.

अमरीका की मदद

माना जाता है कि डॉ. शकील आफरीदी ने दो मई 2011 से करीब एक महीने पहले ऐबटाबाद में एक जाली टीकाकरण अभियान चलाया था और ओसामा बिन लादेन को तलाश करने में अमरीका की मदद की थी.

उस टीकाकरण अभियान के बाद दो मई 2011 को अमरीकी सैनिकों ने ऐबटाबादा में गुप्त कार्रवाई कर ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

उसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने डॉ. शकील आफरीदी को हिरासत में लिया था.

अब तक माना जाता रहा है कि सीआईए की सहायता के आरोप में ही उन पर मुकदमा चलाया गया और सजा सुनाई गई.

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