सुप्रीम कोर्ट की पाक खुफिया एजेंसियों को फटकार

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने बलूचिस्तान की बिगड़ी हुई स्थिति पर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुफिया एजेंसियों से कहा है कि वह लोगों के ख़िलाफ़ केवल मुकदमा चलाएँ और उन्हें क़त्ल न करें.

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बलूचिस्तान प्रांत की बिगड़ी हुई स्थिति के ख़िलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह बात कही.

अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि बलूचिस्तान में जो लोग अर्धसैनिक बलों के ख़िलाफ़ स्थानीय अदालतों में बयान देते हैं कुछ दिनों के बाद उनके शव मिलते हैं.

बलूचिस्तान में बिगड़ी हुई स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा, "प्रांत में स्थिति बेहतर होने की बजाए प्रतिदिन ख़राब होती जा रही है और पिछले दो दिनों में तीन लोगों की हत्या की गई लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तार नहीं हुआ है."

सैन्य अधिकारी की आचोलना

सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों के प्रमुख मेजर जनरल उबेदुल्लाह ख़टक की ओर से की गई पत्रकार वार्ता की कड़ी आलोचना की है. और कहा कि बलूचिस्तान के मुद्दे पर एक सैन्य अधिकारी को पत्रकारों से बातचीत नहीं करनी चाहिए थी.

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस मुद्दे पर सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक परवेज़ कियानी को बुला कर पूछा जाए कि क्या देश को इस तरह चलाना है.

अटर्नी जनरल इरफान कादिर ने बलूचिस्तान के गायब हुए लोगों की एक रिपोर्ट अदालत में पेश की.

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ सालों के दौरान बलूचिस्तान से सैंकड़ों लोग गायब हो गए हैं. बलोच नेताओं का आरोप हैं कि पाकिस्तानी ख़ुफिया एजेंसियों ने इन लोगों का अपहरण किया है और कई लोगों की हत्या भी की है. खुफिया एजेंसियाँ इन आरोपों का खंडन करती आ रही हैं.

अदालत में अटर्नी जनरल की ओर से पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रांत से 123 लोग गायब हुए हैं, जिसमें से अधिकतर का पता लगा लिया गया है.

'विदेशी हाथ लिप्त'

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Image caption पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पिछले कई सालों से हालात ख़राब हैं और बलोच अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

इससे पहले गृह मामलों के सलाहकार रहमान मलिक ने कहा था कि बलूचिस्तान के गायब होने वाले लोगों की संख्या 50 से ज़्यादा नहीं है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बलूचिस्तान की बिगड़ी हुई स्थिति की ज़िम्मेदार कुछ विदेशी खुफिया एजेंसियाँ भी हैं जो पाकिस्तान को कमज़ोर करना चाहती हैं.

उस पर मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने कहा कि ‘हम कैसे कह सकते हैं कि उसमें कुछ विदेशी हाथ लिप्त हैं और अगर ऐसा है तो केंद्र सरकार उस पर नज़र रखे लेकिन बलूचिस्तान में भी तो सरकार नाम की कोई चीज़ नहीं है.’

उनके मुताबिक़ एक प्रांतीय मंत्री ने बयान दिया था कि दो लोगों की हत्या में अर्धसैनिक बल लिप्त हैं लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई खंडन नहीं आया है.

जस्टिस जवाद एस ख़्वाजा ने खुफिया एजेंसियों से कहा है कि वह लोगों के ख़िलाफ मुकदमा ज़रुर चलाएँ लेकिन उन्हें कत्ल न करें.

अटर्नी जनरल इरफान कादिर ने अदालत को बताया कि प्रांत में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.

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