अमरीका ने पाकिस्तान से बातचीत रोकी

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Image caption नाटो सेना के लिए आपूर्ति रूट पर पाकिस्तान से बातचीत कर रहे अमरिकी वार्ताकार बातचीत हट गए हैं

अफगानिस्तान में नैटो सेना के लिए आपूर्ति रूट पर पाकिस्तान के साथ कोई सहमति बनाने की कोशिश कर रहे अमरीका ने फिलहाल बातचीत रोक दी है.

इस बारे में पेंटागन के प्रवक्ता जॉर्ज लिटिल ने कहा, “बातचीत कर रही टीम को कुछ समय के लिए वापस बुलाने का फैसला हुआ है.”

अमरीकी वार्ताकार अभी तक कोई सहमति बना पाने में नाकाम रहे हैं.

नवंबर में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन हमले में अपने 22 सैनिकों के मारे जाने के बाद से पाकिस्तान ने नैटो सेना के लिए यह रूट बंद कर रखा है.

जॉर्ज लिटिल ने बताया, “वार्ताकारों की टीम के कुछ सदस्य इस्लामाबाद से निकल चुके हैं जबकि बाकी जल्द ही अमरीका लौट आएंगे. वहां मौजूद वार्ताकार बहुत ही कम समय के नोटिस पर घर आने को तैयार हैं.”

पाकिस्तानी सैनिकों की मौत पर आधिकारिक माफी मांगने से अमरीका पहले ही इनकार कर चुका है.

वैसे पाकिस्तान नैटो के सामान भरे प्रति एक ट्रक को रास्ता देने की एवज में 5000 अमरीकी डॉलर की मांग कर रहा है.

रास्ता बंद होने के कारण हजारों ट्रक पाकिस्तान में ही फंसे हुए हैं.

दोस्ती में तनाव

नैटो को अफगानिस्तान जाने के लिए मजबूरन मध्य एशिया, रूस और कॉकेशस क्षेत्रों से वैकल्पिक रास्ता चुनना पड़ा.

पिछले हफ्ते अफगानिस्तान से हटने के कार्यक्रम के तहत नैटो ने अपने फंसे हुए वाहनों और सैन्य उपकरणों को निकालने के लिए कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ भी समझौता किया था.

नैटो 2014 तक अफगानिस्तान में अपने अभियान को खत्म करने का संकेत दे चुका है.

वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता किम घटास के अनुसार अमेरिका को लग रहा था कि इन नए रूट के इस्तेमाल से पाकिस्तान पर कोई दबाव बनेगा. लेकिन यह 'उत्तरी वितरण नेटवर्क' काफी मंहगा साबित हो रहा है. इसे देखते हुए पाकिस्तान को लग रहा है कि अमरीका उसकी शर्तें मान लेगा.

पाकिस्तान से बातचीत सात हफ्ते पहले शुरू हुई थी. लेकिन इस दौरान पाकिस्तान और अमरीका के बीच काफी तनाव रहा. खासकर अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के लेकर अमरीका का धैर्य जवाब देने लगा है.

अमरीका पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में हिंसक गतिविधियों में शामिल आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है. पाकिस्तान ने हमेशा ही इन आरोपों का खंडन किया है.

पिछले साल मई में पाकिस्तान की धरती पर अमरीकी सेना के हाथों ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद भी दोनों देशों के बीच संबंध काफी खराब हुए थे. पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया था.

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