पाकिस्तान के प्रति वफादार नहीं थे हक्कानी: आयोग

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Image caption सु्प्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है और रिपोर्ट को आम करने फैसला लिया है.

पाकिस्तान में कथित मेमो की जाँच कर रहे न्यायिक आयोग ने कहा है कि अमरीकी अधिकारियों को लिखा गया मेमो सही था और उसके पीछे अमरीका में पूर्व पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी का हाथ था.

सुप्रीम कोर्ट ने कथित मेमो के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायिक आयोग की रिपोर्ट की समीक्षा की.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.

अदालत ने कथित मेमो की जाँच कर रहे न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का भी फैसला किया है.

न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी को पाकिस्तान का वफादार होना चाहिए था लेकिन वह भूल गए थे कि वह पाकिस्तान के राजदूत हैं.

संविधान का उल्लंघन

रिपोर्ट के मुताबिक़ हुसैन हक्कानी ने पाकिस्तान के संविधान का उल्लंघन किया है और वह ख़ुद प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख बनना चाहते थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने साबित करने की कोशिश की है कि पाकिस्तान की नागरिक सरकार अमरीका की दोस्त है.

अदालत ने इस मुकदमे के सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं और आदेश दिया है कि वह अगली सुनवाई में अदालत में पेश हों.

दूसरी ओर अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने कहा है कि वह जाँच आयोग की रिपोर्ट को चुनौती देंगे क्योंकि उनका पक्ष बिल्कुल नहीं सुना गया था.

'रिपोर्ट सियासी है'

उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा है कि आयोग की कार्रवाई एकतरफा थी और अनुरोध के बावजूद भी उन्हें नहीं सुना गया था.

उन्होंने लिखा कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट अहम मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है और ये रिपोर्ट कानूनी नहीं बल्कि सियासी है.

ग़ौरतलब है कि मेमो विवाद उस 'मेमो' या चिट्ठी से शुरू हुआ था जिसमें अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने अमरीकी सैन्य अधिकारियों को कथित रूप से गुप्त ज्ञापन भेजा था. इसमें अमरीका से पाकिस्तानी सेना की ताक़त को कम करने के लिए कहा गया था.

यह मामला सामने आने के बाद प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने अमरीका में अपने राजदूत हुसैन हक्कानी को इस्लामाबाद बुलाया था, उसके बाद हक्कानी ने पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया था.

पाकिस्तान के नेता कथित तौर पर इस बात से चिंतित थे कि ऐबटाबाद में अमरीकी सुरक्षा बलों के ओसामा बिन लादेन को मारने के बाद सेना तख़्तापलट करने वाली है.

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