सरबजीत की मौत की सजा उम्र कैद में तबदील

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Image caption सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए करीब एक लाख भारतीयों ने हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया था

पाकिस्तान में पिछले 22 साल से कैद और मौत की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की सजा को पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने आजीवन कारावास में तबदील कर दिया है.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के प्रवक्ता फ़रहतुल्लाह बाबर ने इस बात की पुष्टि की है.

उनका कहना था कि मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिए जाने के बाद, क्योंकि सरबजीत सिंह पाकिस्तानी जेलों में 22 वर्ष गुजार चुके हैं, इसलिए उन्हें अब रिहा किया जा सकता है.

भारत में जैसे ही ये खबर पहुँची तो 49-वर्षीय सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर ने बीबीसी को बताया, "हमें पाकिस्तान से कई फोन आ रहे थे. अब यकीन हो गया है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने उनकी सजा को घटाकर उम्रकैद कर दिया है और हम बहुत खुश हैं. अब उनकी रिहाई हो सकती है और वे कभी भी भारत आ सकते हैं."

सरबजीत सिंह को पाकिस्तान पंजाब में 1990 में हुए बम धमाकों के सिलसिले में लाहौर की एक अदालत ने 1991 में दोषी पाया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी. हालाँकि सरबजीत का परिवार इन आरोपों को झूठा बताता रहा है.

सरबजीत को छुड़ाने के कई प्रयास

गौरतलब है कि ये पाँचवी बार था कि सरबजीत सिंह की ओर से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से फिर दया की गुहार लगाई गई थी.

इसी साल आठ जून को सबरजीत की बहन दलबीर कौर लाहौर गई थीं और उन्होंने कोट लखपत जेल में कैद अपने भाई सरबजीत सिंह से मुलाक़ात करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी थी.

उन्होंने बाद में सरबजीत सिंह के वकील ओवैस शैख़ के साथ प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था, “मैंने राष्ट्रपति ज़रदारी जी से आग्रह किया है कि वह मेहरबानी करके सरबजीत के मामले की तरफ़ ध्यान दें और उनकी मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदल दें.”

ओवैस शेख के मुताबिक सरबजीत की रिहाई के लिए राष्ट्रपति जरदारी को दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सयद अहमद बुखारी और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के प्रभारी मोहम्मद यामीन हाशमी के पत्र भेजे गए थे जिनमें हमदर्दी की बुनियाद पर सरबजीत को रिहा करने का अनुरोध किया गया है.

इससे पहले वर्ष 2008 में सरबजीत सिंह को फाँसी दी जानी थी लेकिन भारत सरकार के दबाव के बाद पाकिस्तान की सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी और तब से ये मामला अधर में लटका हुआ था.

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