सरबजीत के वकील ने कहा, मुकदमे में खामियां

  • 7 जुलाई 2012
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Image caption सरबजीत का परिवार इन आरोपों को झूठा बताता रहा है

पाकिस्तान में पिछले 22 साल से कैद और मौत की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के वकील ने कहा है कि उनके खिलाफ चलाए जा रहे मुकदमे में खामियां हैं और पाकिस्तान सरकार को इसे उम्र कैद की सजा में तब्दील कर देना चाहिए.

सरबजीत सिंह के वकील ओवैस शेख ने कहा कि इस मुकदमे के दौरान पाकिस्तान में अदालतों ने कई गलतियाँ की और यही गलतियाँ तब भी हुईं जब उनकी मौत की सजा पर सुनवाई हुई.

उन्होंने कहा, "सरबजीत सिंह का मामला वैसे भी गलत पहचान का है और अदालत ने उनके साथ उस तरह की नरमी नहीं बरती जैसी कि स्थानीय पाकिस्तानी अभियुक्तों के साथ बरती जाती है."

पत्रकारों के समक्ष सरबजीत सिंह का बयान पेश करते हुए उनके वकील ओवैस शेख ने कहा कि सरबजीत ने कभी भी अपना जुर्म कुबूल ही नहीं किया है और पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने उन्हें अदालत के समक्ष मंजीत सिंह नामक एक व्यक्ति की जगह पेश कर दिया. साथ ही सरबजीत सिंह के वकील ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरबजीत सिंह को अपना इकबालिया बयान टीवी कैमरे पर रिकॉर्ड किया गया जिसकी कोर्ट में कोई मान्यता नहीं होती.

खंडन

इससे पहले जून के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के प्रवक्ता फ़रहतुल्लाह बाबर के हवाले से ऐसी भी खबर आई थी कि सरबजीत सिंह की मौत की सजा उम्र कैद में तब्दील कर दी गई है. इसके बाद कहा जा रहा था कि अब वे रिहा किए जा सकते हैं क्योंकि उन्होंने पर्याप्त समय जेल में गुजार लिया है.

हालांकि इस खबर के चौबीस घंटे के भीतर ही फरहतुल्लाह बाबर ने कहा था कि सरबजीत सिंह की फाँसी की सज़ा को उम्र कैद में तबदील करने की ख़बर गलत है और दरअसल एक दूसरे भारतीय कैदी सुरजीत सिंह को रिहा किया जा रहा है.

इस स्पष्टीकरण के एक दिन बाद ही 69 वर्षीय सुरजीत सिंह को पाकिस्तान की एक जेल से रिहा कर दिया गया और वे उसी दिन वाघा बॉर्डर के जारिए भारत पहुँच गए थे.

जबकि सरबजीत सिंह को पाकिस्तान पंजाब में 1990 में हुए बम धमाकों के सिलसिले में लाहौर की एक अदालत ने 1991 में दोषी पाया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी.

हालाँकि सरबजीत का परिवार इन आरोपों को झूठा बताता रहा है.

उनकी मौत की सज़ा को लेकर रहम की अपील पाकिस्तानी राष्ट्रपति के समक्ष लंबित है.

उनकी रिहाई के लिए कई मानवाधिकार कार्यकर्ता अपील कर चुके हैं और दोनों देशों के राजनयिकों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है.

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