पाक: पोलियो अभियान में जुटी यूएन की गाड़ी पर हमला

यूएन की गाड़ी पर हमला
Image caption हमले में विदेशी डॉक्टर और गाड़ी के ड्राइवर को चोटें आई हैं.

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में बच्चों को पोलियो से बचने की दवा पिलाने के अभियान में शामिल संयुक्त राष्ट्र की एक गाड़ी पर हमला किया गया है जिसमें एक विदेशी डॉक्टर को गंभीर चोटें आईं हैं.

अधिकारियों के अनुसार ये घटना शहर के शोहराब गोठ इलाके की है. इस हमले में गाड़ी के ड्राइवर को भी चोटें आई हैं.

किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन तालिबान पोलियो से बचाव की दवा पिलाने के अभियान के खिलाफ धमकियां देता रहा है. जिस इलाके में ये हमला हुआ, वहां तालिबान चरमपंथी सक्रिय बताए जाते हैं.

सोमवार को पाकिस्तान में बच्चों को दवा पिलाने की नई मुहिम की शुरुआत हुई.

पोलिया की महामारी

अधिकारियों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के घायल डॉक्टर को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है लेकिन अभी उनकी राष्ट्रीयता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है.

स्थानीय पुलिस प्रमुख मोहम्मद सुल्तान ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि घायल डॉक्टर इलाके में पिछले तीन महीने से काम कर रहे थे और संभव है कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया गया हो.

सुल्तान ने कहा, “इसका संबंध पोलियो अभियान से हो सकता है क्योंकि इसका विरोध हो रहा है. हम अब भी इस हमले की वजह को जानने के लिए छानबीन कर रहे हैं.”

पाकिस्तान उन तीन देशों में शामिल है जहां पोलिया अब भी एक महामारी बना हुआ है. इससे प्रभावित अन्य दो देश अफगानिस्तान और नाइजीरिया हैं.

पाकिस्तान का कहना है कि सोमवार से शुरू हुए तीन दिन के इस अभियान में पांच साल से कम उम्र के 3.4 करोड़ बच्चों को पोलिया से बचने की दवा पिलाई जाएगी.

'जासूसी की मुहिम'

लेकिन देश के कबायली इलाकों में ढाई लाख बच्चे ये दवा नहीं पी सकेंगे क्योंकि वहां तालिबान ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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Image caption पाकिस्तान दुनिया के उन तीन देशों में शामिल है जहां पोलियो अब भी एक महामारी है.

हाल ही में तालिबान ने कहा कि जब तक अमरीका ड्रोन हमले नहीं रोकेगा तब तक उत्तरी और दक्षिणी वजीरिस्तान में पोलियो के अभियान पर प्रतिबंध रहेगा.

पाकिस्तान में कुछ धार्मिक नेता भी बच्चों को पोलियो से बचने की दवा पिलाने का विरोध कर रहे हैं. पाकिस्तान में अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एक ऐसे ही फर्जी अभियान में एबटाबाद शहर में ओसामा बिन लादेन का पता लगाया गया था.

कराची में बीबीसी संवाददाता सैयद शोएब हसन का कहना है कि अतीत में पोलियो विरोधी अभियान को रोकने के लिए चरमपंथी कुछ विदेशी गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं का अपहरण कर चुके हैं. उनका है कि लोगों की जासूसी करने के लिए पश्चिमी और स्थानीय खुफिया एजेंसियों ने इस मुहिम की रूपरेखा तैयार की है.

पाकिस्तान में 2011 में लगभग 200 पोलियो के मामले सामने आए जो लांसेट मेडिकल जर्नल के अनुसार एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे खराब आंकड़े हैं.

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