करगिल के 13 साल, पाकिस्तान में ख़ामोशी

  • 26 जुलाई 2012
कारगिल युद्ध का विरोध इमेज कॉपीरइट AP
Image caption पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में कारगिल युद्ध के दिन पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन होते थे.

भारत में करगिलयुद्ध का विजय दिवस मनाया जा रहा है लेकिन पाकिस्तान में बिल्कुल ख़ामोशी है और मीडिया भी कोई ख़ास महत्व नहीं दे रहा है.

भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में करगिल के पहाड़ों पर जंग हो गई थी और बाद भारत ने करगिल की पहाड़ियाँ फिर से अपने कब्ज़े में ले ली थीं.

जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान में ख़ामोशी का कारण यह है कि अब सेना, सरकार और जनता को पता चल गया है कि करागिल की युद्ध 'एक बहुत बड़ी ग़लती थी.'

जाने-माने विश्लेषक प्रोफीसर शमीम अख़तर कहते हैं, “ख़ामोशी का कारण यह है कि इन सबको विश्वास हो गया है कि वह जो युद्ध था, वह बड़ी भूल थी और उसको याद करते हुए भी शर्म आती है.”

उन्होंने कहा कि पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में इसी दिन को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता था - कोई उस पर मातम करता था तो कोई उसे विजय घोषित करता था.

'जंग की ज़रुरत नहीं थी'

वह कहते हैं, “मैं तो उस वक़्त भी समझता था कि इसमें पाकिस्तान की ग़लती है लेकिन अब तो पूरी जनता को जानकारी हो गई है कि उस युद्ध की ज़रुरत ही नहीं थी. सेना ने ज़बरदस्ती जंग लड़ी और कई लोग मारे गए.”

उनके मुताबिक़ पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने स्वार्थ के लिए यह जंग लड़ी थी और कुछ सैन्य अधिकारियों ने उनको उकसाया था.

वरिष्ठ पत्रकार एहतिशाम का मानना है कि करगिलकी जंग पाकिस्तानी सरकार और जनता के लिए शर्मिंदगी की बात थी और सेना ने इसको लेकर किसी को सही जानकारी भी नहीं दी.

उन्होंने कहा, “पहले बताया गया था कि भारतीय सेना के साथ कश्मीरी चरमपंथी लड़ रहे हैं लेकिन बाद में अमरीका ने बताया कि भारतीय सेना के साथ तो पाकिस्तानी सैनिक लड़ रहे हैं.”

जाँच आयोग की माँग

उन्होंने बताया कि इस स्थिति में पाकिस्तान के लिए कोई ऐसी बात नहीं है कि पाकिस्तान करगिल युद्ध का दिवस मनाए.

एहतिशाम का कहना है कि करगिल युद्ध की जाँच के लिए भारत में आयोग बना और उन्होंने साबित कर दिया कि उसमें पाकिस्तान की ग़लती थी लेकिन पाकिस्तान में मांग के बावजूद किसी को कोई सच्चाई नहीं बताई गई.

उन्होंने बताया कि अब सरकार भारत के साथ संबंध बहतर करने की कोशिश कर रही है और इस स्थिति में ऐसे दिनों को याद नहीं करना चाहती हैं और सरकार समझती है कि शायद इसे संबंध ख़ाराब हो जाएं.

ग़ौरतलब है कि करगिल युद्ध को लेकर पाकिस्तानी सेना पर कड़ी आलोचना हो रही है और इसकी जाँच के लिए एक आयोग के कठन की माँग भी हो रही है लेकिन सेना ने अभी तक कोई सही जानकारी नहीं दी है.

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