ओसामा की मौत में भूमिका से अनजान था:अफ़रीदी

 मंगलवार, 11 सितंबर, 2012 को 18:02 IST तक के समाचार
शकील अफ़रीदी

शकील अफ़रीदी कहते हैं कि उन्हें बिन लादेन को मारने की अमरीकी योजना के बारे में कुछ पता नहीं था

ओसामा बिन लादेन की खोज में अमरीकियों की सहायता करने वाले पाकिस्तान डॉक्टर ने कहा है कि वो अल-क़ायदा प्रमुख की मौत में अपनी भूमिका के बारे में अनजान थे.

अपनी गिरफ़्तारी के बाद पहली बार अमरीकी मीडिया कंपनी फ़ॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए अफ़रीदी ने कहा कि ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद उन्होंने भागने की ज़रुरत नहीं समझी. लेकिन बाद में उन्होंने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने अग़वा कर लिया.

उन्होंने अमरीकी मीडिया कंपनी को ये भी बताया कि जेल में उन्हें हथकड़ियों में रखा गया था इसलिए उन्हें कुत्तों की तरह झुककर सीधे मुंह से खाना खाना पड़ता था.

बताया जा रहा है कि पेशावर जेल में बंद डॉक्टर अफ़रीदी से फोन द्वारा संपर्क किया गया था.

बीबीसी ने जब जेल अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने इस इंटरव्यू के बारे में हैरानगी जताई. लेकिन अधिकारियों ने ये भी माना की जेल के अंदर फ़ोन ले जाना नामुमकिन नहीं है.

डॉक्टर अफ़रीदी पर आरोप है कि उन्होंने फ़र्जी टीकाकरण अभियान चलाकर बिन लादेन के परिवार के खून के नमूने इकट्ठा करने का प्रयास किया था.

उन्हें मई में चरमपंथी गुटों के समर्थन के ज़ुल्म में 33 साल की सज़ा सुनाई गई है लेकिन बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार ये सज़ा उसे सीआईए की सहायता करने के लिए दी जा रही है.

'अमरीकी योजना के बारे में पता नहीं था'

"मुझे नहीं मालूम था कि मेरे काम से किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाया जा रहा है. मुझे ये मालूम था कि उस अहाते में कुछ आतंकी रह रहे हैं लेकिन उनके नाम मुझे नहीं मालूम थे. मैं हैरान था. मुझे यक़ीन नहीं हो रहा था कि मैं इन मौतों से जुड़ा हुआ हूं."

डॉक्टर अफ़रीदी

फ़ॉक्स न्यूज़ ने ये इंटरव्यू 9/11 हमलों की 11वीं वर्षगांठ पर छापा है.

डॉक्टर अफ़रीदी ने फ़ॉक्स न्यूज़ को बताया, “ मुझे नहीं मालूम था कि मेरे काम से किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाया जा रहा है. मुझे ये मालूम था कि उस अहाते में कुछ आतंकी रह रहे हैं लेकिन उनके नाम मुझे नहीं मालूम थे. मैं हैरान था. मुझे यक़ीन नहीं हो रहा था कि मैं इन मौतों से जुड़ा हुआ हूं.”

अफ़रीदी ने बताया कि सीआईए ने उन्हें अफ़गानिस्तान भाग जाने की सलाह दी थी.

लेकिन वो सीमावर्ती इलाके में जाने से डर गए. वैसे अफ़रीदी के अनुसार उन्हें नहीं लगता था कि वे बिन लादेन को मारने वाले अभियान में किसी तरह से शामिल थे.

अफ़रीदी को पिछले साल 22 मई के दिन हयाताबाद नाम के स्थान पर लादेन की मौत से बीस दिन बाद पकड़ा गया था.

अफ़रीदी कहते हैं कि इसके बाद आठ महीनों तक उन्हें आंखों पर पट्टी बांध और फिर एक साल तक हथकड़ियां लगाकर इस्लामाबाद स्थित आईएसआई मुख्यालय के तहख़ाने में रखा गया था.

वे कहते हैं, “ मैं एक कुत्ते तरह झुककर अपनी थाली से खाता था क्योंकि मेरे हाथ पीछे बंधे हुए होते थे. वे कहते थे कि अमरीकी हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं, भारतीयों से भी ख़राब. ”

‘प्यार और सम्मान’

शकील अफ़रीदी

शकील अफ़रीदी ने फ़ॉक्स न्यूज़ को बताया, “ मेरे दिल में आप के लोगों के प्रति बहुत स्नेह और सम्मान है.”

डॉक्टर अफ़रीदी कहते हैं कि उन्हें सीआईए के साथ काम करने पर गर्व है और अगर ज़रुरत पड़ी तो वे भविष्य में भी ऐसा करेंगे.

उन्होंने फ़ॉक्स न्यूज़ को बताया, “ मेरे दिल में आप के लोगों के प्रति बहुत स्नेह और सम्मान है.”

अफ़रीदी के आरोपों पर पाकिस्तान से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

लेकिन पाकिस्तान का हमेशा से यही कहना रहा है कि अफ़रीदी के साथ वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है जैसा किसी विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी का सहयोग करने वाले के साथ किया जाता है.

अमरीकी विदेश और रक्षा मंत्री पहले ही डॉ अफ़रीदी की गिरफ़्तारी को गलत बताते हुए उनकी रिहाई की मांग कर चुके हैं.

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