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बुधवार, 25 फ़रवरी, 2004 को 21:02 GMT तक के समाचार
 
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बिहार में बीबीसी हिंदी का कारवाँ
 

 
 
बीबीसी का कारवाँ
बीबीसी का कारवाँ उत्तर प्रदेश के बाद अब बिहार में श्रोताओं से मुलाक़ात कर रहा है
बीबीसी हिंदी के कारवाँ ने बिहार में अपनी यात्रा के शुरूआती चरण में पटना में पड़ाव डाला.

मंगलवार को पटना में श्रोताओं से मुलाक़ात के लिए चौपाल लगाने के बाद मंगलवार को बीबीसी हिंदी टीम ने पटना में स्थानीय पत्रकारों से बातचीत की.

पत्रकार सम्मेलन में लगभग 40 पत्रकार आए जो विभिन्न हिंदी और अंग्रेज़ी अख़बारों, समाचार एजेंसियों,टेलीविज़न तथा रेडियो संस्थाओं से जुड़े थे.

अन्य संवाददाता सम्मेलनों की तरह यहाँ भी पहला प्रश्न कारवाँ के उद्देश्य के बारे में आया.

ये भी पूछा गया कि कहीं हिंदी सेवा ने ये सोचकर तो ये कोशिश नही शुरू की कि रेडियो के अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है.

ऐसी भी बात उठी कि कहीं कारवाँ के पीछे बाज़ार की शक्तियाँ तो काम नहीं कर रही हैं और टेलीविज़न की तरह बीबीसी हिंदी रेडियो भी अपने श्रोताओं से मिलने निकल पड़ा.

पटना में बीबीसी के श्रोताओं के विचार जानती बीबीसी की टीम

सवाल बीबीसी की तटस्थता को लेकर भी उठे और ये पूछा गया कि क्या हटन रिपोर्ट और इराक़ युद्ध के बाद बीबीसी अपनी निष्पक्षता को बनाए रख सकती है.

बीबीसी के कार्यक्रमों के बारे में विशेष तौर पर तो कोई सवाल नहीं उठा मगर 'कैरियर क्या करूँ' कार्यक्रम के उद्देश्य पर एक सवाल आया.

जवाब सरल था कि कारवाँ के अनुभव को देखकर लगता है कि युवा श्रोता इस कार्यक्रम को काफ़ी पसंद कर रहे हैं और इस कारण उनकी रूचि को ध्यान में रखकर ही ये कार्यक्रम शुरू किया गया.

वैसे कारवाँ का रूख़ जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश से बिहार की ओर हो रहा है वैसे-वैसे इसे लेकर बीबीसी के प्रशंसकों का उत्साह बढ़ता नज़र आ रहा है.

कारण इसका ये हो सकता है कि जैसे-जैसे कारवाँ आगे बढ़ रहा है इसके बारे में जानकारियाँ फैलती जा रही हैं और श्रोताओं को इस कारण इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने का मौक़ा मिल रहा है.

कई श्रोता तो ऐसे मिले जो 50-50 और 100-100 मील दूर से आ रहे हैं.

कई श्रोता तो ऐसे भी हैं जो बीबीसी की टीम से मिलने के लिए, बात करने के लिए, उनके हस्ताक्षर लेने के लिए होटलों में रूके हुए हैं.

बीबीसी का कारवाँ गुरूवार को पटना से छपरा के लिए रवाना हो रहा है.

छपरा भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जन्म स्थान और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कर्मभूमि के तौर पर तो जाना ही जाता है इसका वर्तमान राजनीति में भी अपना महत्व है.

राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू यादव यहाँ से दो-दो बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं और वाजपेयी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री राजीव प्रताप सिंह अभी यहीं से सांसद हैं.

छपरा में बीबीसी हिंदी जो श्रोता सभा आयोजित कर रही है उसका विषय है अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत की स्थिति.

ये सभा छपरा गर्ल्स हाई स्कूल में गुरूवार दोपहर को हो रही है.

 
 
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