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सोमवार, 27 सितंबर, 2004 को 12:50 GMT तक के समाचार
 
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ताजमहल 350 साल का हुआ
 
ताजमहल
ताज को करोड़ों लोग प्रेम का प्रतीक मानते हैं
दुनिया भर में प्रेम का प्रतीक माना जाने वाला ताजमहल 350 साल का हो गया है और इस अवसर पर वहाँ विशेष समारोह शुरु तो हुए हैं.

वैसे तो दुनिया भर से ताज को देखने वालों का ताँता लगा रहता है लेकिन इस ख़ास मौक़े पर देश विदेश से ताज के दीवानों की भारी भीड़ जमा हुई है.

ताजमहल को चाँदनी रात में देखने की ख़्वाहिश सभी को रहती है लेकिन इस विश्व धरोहर को पर्यावरण प्रदूषण से बचाने के उपायों के तहत सुप्रीम कोर्ट ने रात में इसे देखने की इजाज़त नहीं दी है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने ताज मेले के दौरान यमुना नदी के किनारे छह महीने तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त माँगी थी और साथ ही यह भी अनुरोध किया था कि सैलानियों को पूरी चाँदनी रातों में ताजमहल को देखने की इजाज़त दी जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि क्या उसने यह समारोह आयोजित करने के लिए पर्यावरण और सुरक्षा एजेंसियों से हरी झं ले ली है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और केंद्रीय गृहमंत्रालय से हरी झंडी लिए बिना ताजमहल के पास ऐसे समारोह आयोजित करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती."

न्यायालय ने साथ ही रात में ताजमहल देखने की इजाज़त वाली अर्ज़ी को भी ख़ारिज कर दिया.

न्यायालय ने कहा कि ऐसा पूरा ख़तरा है कि रात में ताजमहल को देखने के दौरान इस विश्व धरोहर को कोई नुक़सान पहुँचाया जा सकता है और वहाँ चोरी भी हो सकती है.

"इसलिए सुरक्षा एजेंसियों की झंडी के बिना रात में ताजमहल को देखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती."

क़ब्र बनी धरोहर

मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने इस मक़बरे को अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनवाया था.

ताज महल
चाँदनी रात में ताज की छटा देखते ही बनती है

इसका निर्माण 1631 में शुरू हुआ और बीस हज़ार लोगों की मेहनत से यह 1653 में बन कर तैयार हुआ था.

आज भी रोज़ाना हज़ारों पर्यटक और प्रेमी, देश विदेश से प्रेम और समर्पण के इस प्रतीक को देखने के लिए आते हैं.

ताज मेला

सुप्रीम कोर्ट की पाबंदियों के बीच ही ताज मेला परंपरागत तरीक़े से शुरू हो गया हालाँकि यह ताज से कुछ दूरी पर आयोजित किया जा रहा है.

ताजमहल से कुछ दूरी पर दो कलाकारों ने शाहजहाँ और मुमताज महल की वेषभूषा पहन रखी थी और उन्होंने 17वीं शताब्दी के उस रोमांस को पेश करने की कोशिश की जिससे ताजमहल जैसी इमारत का जन्म हुआ.

शाहजहाँ की भूमिका निभाने वाले कलाकार रंजन कुमार का कहना था, "हमारा मक़सद लोगों के दिलों से नफ़रत निकालकर प्यार और मोहब्बत से रहने के लिए प्रोत्साहित करना है और इसके लिए ताजमहल से अच्छी मिसाल और क्या हो सकती है."

इस मौक़े पर संगीत शामों का भी आयोजन किया गया जिसमें जाने-माने संगीतकारों का हुनर देखने को मिलेगा.

 
 
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