BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
गुरुवार, 21 अक्तूबर, 2004 को 12:09 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
ताजमहल की मीनार झुकने का विवाद
 

 
 
ताज महल
ताज महल की 350वीं वर्षगाँठ भी मनाई जा रही है
एक ओर दुनिया भर में मोहब्बत की निशानी के रुप में मशहूर ताजमहल की 350 वीं वर्षगाँठ मनाई जा रही है तो दूसरी ओर इसे लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है.

ऐसी ख़बरें हैं कि इसकी मीनारें झुक रही हैं.

कहा जा रहा है कि ताजमहल के पीछे बहने वाली यमुना के जल स्तर में परिवर्तन की वजह से ऐसा हुआ है.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि ताजमहल में मक़बरे के ऊपर बनी एक मीनार तीन इंच तक झुक चुकी है और सरकार ने इसकी जाँच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बना दी है.

भारतीय पुरातत्व विभाग के अनवर अतीक सिद्दीक़ी का कहना है कि इन ख़बरों में कोई सच्चाई नहीं है.

उनका कहना है कि दिल्ली के एक सुपरिंटेंडेंट से इन ख़बरों की जाँच करने के लिए कहा गया है.

अनवर अतीक सिद्दीक़ी का कहना है, "ताजमहल की ठीक तरह से देखभाल की जा रही है और वह 350 साल पहले जिस तरह था, आज भी उसी तरह है. मेरे विचार में मीनार झुकने की बात बेबुनियाद है."

ग़ौरतलब है संयुक्त राष्ट्र की सूची में वैश्विक धरोहर घोषित ताजमहल की देखरेख की ज़िम्मेदारी भारतीय पुरातत्व विभाग की है.

शोधपत्र और यमुना

इन ख़बरों की शुरुआत प्रोफ़ेसर रामनाथ के शोधपत्र से हुई है.

अपने शोधपत्र में प्रोफ़ेसर रामनाथ ने कहा है कि 1940 से 1965 के बीच मीनारों में झुकाव आया और भारतीय पुरातत्व विभाग ने हिदायतों के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया.

 इस तरह की ख़बरें 20-25 साल पहले भी मिली थीं और इसी के बाद लोगों को मीनारों पर चढ़ने की मनाही कर दी गई थी
 
इरफ़ान हबीब, इतिहासकार

उनका कहना है, "ताजमहल के पीछे से बहने वाली यमुना ही ताजमहल की सुरक्षा की गारंटी है. उसमें जल स्तर हर हाल में बरकरार रखना होगा."

इस ख़बर के बारे में इतिहासकार इरफ़ान हबीब भी कहते हैं, "इस तरह की ख़बरें 20-25 साल पहले भी मिली थीं और इसी के बाद लोगों को मीनारों पर चढ़ने की मनाही कर दी गई थी."

उनका कहना है कि तब यह भी बताया गया था कि यह ख़तरनाक हो सकता है.

मुग़ल कालीन वास्तुकला के जानकार एमसी जोशी का कहना है कि ताजमहल के निर्माण में यमुना का अच्छी तरह उपयोग किया गया है.

उनका कहना है, "ताज को इस तरह बनाया गया है कि यदि इसमें पानी का स्तर 20-25 फुट भी ऊपर आता है तो नुक़सान नहीं होगा."

उनका कहना है कि यदि नदी के जल स्तर में परिवर्तन होगा तो निश्चित तौर पर ताजमहल पर असर पड़ेगा.

प्रोफ़ेसर रामनाथ इसे यमुना के किनारे बन रहे व्यावसायिक परिसर 'ताज कॉरिडोर' से जोड़ते हैं. वे मानते हैं कि यमुना के तट पर किसी भी तरह के निर्माण से जल स्तर बदलेगा.

राजनीतिक विवाद

'ताज कॉरिडोर' पहले ही राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है.

मीनार झुकने और उसका संबंध 'ताज कॉरिडोर' से जुड़ने और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समिति के गठन के बाद से इस पूरे मामले में लोगों को लग रहा है कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.

मायावती
ताज कॉरिडोर की जाँच सीबीआई कर रही है

भारतीय पुरातत्तव विभाग का कहना है कि ताज की देखरेख की पूरी ज़िम्मेदारी जब भारतीय पुरातत्तव विभाग की है तब उत्तर प्रदेश सरकार इसकी जाँच के लिए किस तरह समिति बना सकती है.

इस मामले में राजनीति देखने वालों का तर्क है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बीच जैसे राजनीतिक रिश्ते हैं उसकी वजह से मुलायम सिंह यादव को 'ताज कॉरिडोर' मामले का उछलना राजनीतिक रुप से फ़ायदेमंद लग सकता है.

दूसरी और मुलायम सिंह यादव और केंद्र की कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के रिश्ते भी तनावपूर्ण हैं.

इस मामले के पीछे कारण जो भी हों, फ़िलहाल मोहब्बत की निशानी ताजमहल विवाद में तो घिर ही गया है.

 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
 
 
इंटरनेट लिंक्स
 
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
 
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>