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गुरुवार, 24 नवंबर, 2005 को 10:35 GMT तक के समाचार

जयप्रकाश पाराशर

सुकून का बढ़ता माया-बाज़ार

हाई ब्लडप्रेशर के लिए भी कुछ है आपके पास? रहस्यमयी पत्थरों के उस स्टॉल पर आए क़रीब 60 साल के उस आदमी का यही सीधा सवाल था.

दुकानदार योगेश ने तत्काल एक पत्थर उस बूढ़े आदमी की हथेली पर रखा. उनके पास दुनिया की हर बीमारी के लिए एक पत्थर था.

उनका कहना था, ''कुछ मिनट दबाए रखिए और दो तीन दिन में खुद फर्क़ महसूस करेंगे. कीमत महज तीन सौ रुपये. असर दिखाई न दे तो स्टोन वापस!''

वहाँ तरह-तरह के रंग बिरंगे हज़ारों पत्थर थे, जो तमाम दुनियावी मुश्किलों से निजात दिलाने का दावा कर रहे थे. बल्कि तर्क और विज्ञान को पत्थर बना रहे थे.

किसी को पता नहीं कि ये पत्थर क्या हैं और इतने धड़ल्ले से क्यों बिक रहे हैं ?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के एक बड़े हिस्से में लगा 'मिस्टिक वर्ल्ड' शुभजीवन के फैलते व्यवसाय की नुमाइश है.

चीन से आने वाली फेंग शुई जो ऊर्जा की दिशा बदल देती है तो योग कंपनियां जिंदगी की दिशा बदलने में लगी हैं.

हिप्नोथेरेपी से बीमारी दूर करने का दावा करने वाले लोग है.

`एक योगी की आत्मकथा` लिखने वाले परमहंस योगानंद की तसवीर के नीचे बैठे गोरे, हिंदुस्तानिय़ों को योग की बारीकियां समझाते हैं. हथेलियां पढ़ते ज्योतिषी. कार्ड फेंटती टेरट गुरु.

समाज मनोविज्ञानी आशीष नंदी इसे लोगों की 'आधुनिक जीवन शैली के कारण पैदा होने वाली चिंता और तनाव से मुक्ति की कोशिश' मानते हैं.

रहस्य की परतें

नौ साल से टेरट कार्ड के जरिए लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहीं नंदिता पांडे को अपने काम को विज्ञानसम्मत नहीं मानने में कोई हिचक नहीं.

''टेरट कोई विज्ञान नहीं है. यह मिस्टिक लॉ से चलता है. ये कार्ड किसी के लिए कागज पर छपी तस्वीरें हो सकती हैं, लेकिन मेरे लिए आत्मा का विस्तार हैं.''

नंदिता व्यस्त भविष्यवक्ताओं में से हैं. वो पत्र-पत्रिकाओं में कॉलम लिखती हैं, टीवी चैनलों पर जाती हैं और रोजाना 40-50 लोगों को सलाह देती हैं.

प्रत्येक व्यक्ति से वह 500 रुपये लेती हैं. ज्योतिष में भी काम करने वाली नंदिता का दावा है कि उन्होंने इंडियन ऑयल क्रिकेट सीरीज़ के नतीजे पहले ही बता दिए थे.

ध्यान से हीलिंग करने वाले हनुतश्री विज्ञान को ही चुनौती देते हैं. '' विज्ञान वास्तव में एक मेल्टिंग पॉट की तरह है. सौ साल में यह काफ़ी बदल जाएगा. कई सिद्धांत गलत साबित हो जाएंगे. कुछ चीजों को विज्ञान से बाहर ही रहने दें.''

फेंग शुई का माया बाज़ार अपने आप में इतना बड़ा हो गया है कि सलाहकार अलग हैं और दुकानें अलग.

कुछ हिस्सा चीन से आयात हो रहा है तो दिल्ली के टोले मुहल्लों में नक़ली सामान भी बन रहा है.

दिल्ली के ही दुकानदार पीके जैन अब फेंग शुई के बजाय क्रिस्टल में ज्यादा काम करने लगे हैं. वो कहते हैं, ''अब नक़ली माल बहुत बनने लगा है.''

मुंबई के उपेश सांवला फेंग शुई में जबरदस्त भरोसा करने वाले इंसान है. वो क़रीब 150-200 किस्म की वस्तुएं बेंचते हैं.

सिक्के आमदनी की सुरक्षा करते हैं, तो तीन टांगों वाला मेंढक घर में धन लाता है.

120 रुपये का एजुकेशन टॉवर बच्चों का पढ़ने में मन लगा सकता है. विंड चाइम तो हर घर के दरवाजे पर टंगे हुए हैं, जो हर बुरी चीज को दरवाजे पर रोक रहे हैं.

आशीष नंदी के मुताबिक, ''भारत में धर्म निहायत स्थानीय स्वरूप में यानी ग्राम देवता या कुल देवता के रूप में था. लेकिन सामाजिक गतिशीलता के कारण अब लोग उसकी तलाश ऐसी सामान्य चीजों में करने लगते हैं.''

आत्मा बाजार

सूचना से आक्रांत समय में योग और ध्यान सबसे बिकाऊ कमोडिटी है. पिछले साल 52 करोड़ का कारोबार करने वाली टीएसडब्ल्यू मुंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध है.

आत्मा को राहत देने का उसका धंधा है. डॉ आलम अली उसके निदेशक हैं जो पातंजलि योग में एमएससी व पीएचडी हैं.

ईशा फाउंडेशन के जग्गी गुरू वासुदेव आंतरिक इंजीनियरिंग का मंत्र दे रहे हैं.

उनके फार्मूले से आप रचनात्मकता और उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, एकाग्रता व याददाश्त बढ़ा सकते हैं, तनावमुक्त जिंदगी बिता सकते हैं, दैहिक व दैविक बाधाओं से मुक्त हो सकते हैं. वह भी मात्र 1500 रुपये में.

सदगुरु कभी कारपोरेट एक्जीक्यूटिव्स के साथ होते हैं और कभी अपराधियों को जिंदगी बदलने के सूत्र बताते हैं.

शायद डॉ. नंदी इसीलिए कहते हैं,'' ये गुरु अनधिकृत मनश्चिकित्सक की भूमिका ही निभा रहे हैं, क्योंकि नई जीवन शैली के कारण लोगों की जिंदगी में तनाव पैदा हो रहा है और वे मुक्ति चाहते हैं.''

भरत ठाकुर और विक्रम चौधरी तो पश्चिमी दुनिया की जुबान पर चढ़ चुके नाम हैं. जिनकी कंपनियां करोड़ों का कारोबार कर रही हैं.

योग और ध्यान अब कैप्सूल में भी आने लगे हैं. जिस क्रियायोग को करने में परमहंस योगानंद ने पूरी जिंदगी लगा दी, आनंद संघ के योगाचार्य धर्मदास 350 रुपये में एक दिन की वर्कशॉप आयोजित कर रहे हैं.