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रविवार, 09 अप्रैल, 2006 को 16:24 GMT तक के समाचार
 
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पीड़ित का परिवार भी अपील कर सके: खरे
 

 
 
खरे
खरे मानते हैं कि कानून में सुधार होना चाहिए
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वीएन खरे का कहना है कि भारतीय क़ानून में बदलाव कर आपराधिक मामलों में पीड़ित और उसके परिवार को भी अपील दायर करने का अधिकार दिया जाना चाहिए, नहीं तो जेसिका लाल जैसे मामले बार-बार सामने आएँगे.

मॉडल जेसिका लाल और पत्रकार इरफ़ान की हत्याओं के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अपराध कानूनों को प्रभावी बनाने के लिए ऐसे बदलाव ज़रूरी हैं.

पूर्व मुख्य न्यायाधीश खरे ने बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम, 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए ये विचार व्यक्त किए.

एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में उन्होंने कहा कि जिन मामलों में जाने-माने और प्रभावशाली लोगों या उनके रिश्तेदारों पर आरोप हों, उन मामलों की जाँच तो पुलिस की विशेष शाखा को करनी ही चाहिए लेकिन उन मामलों में अभियोग भी विशेष शाखा को ही चलाना चाहिए.

जेसिका मामला
 मेरी बहन की हत्या का मामला इतना लंबा खिंचा कि इसके लिए किसी एक को दोष देना अब संभव नहीं है. लेकिन मुझे अब उच्च न्यायालय से काफ़ी उम्मीद है
 
सबरीना लाल

खरे ने कहा, "लोगों को न्याय व्यवस्था में अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए. इसमें कुछ सुधारों की ज़रूरत आवश्य है."

मॉडल जेसिका लाल की बहन, सबरीना लाल ने बीबीसी को बताया, "मेरी बहन की हत्या का मामला इतना लंबा खिंचा कि इसके लिए किसी एक को दोष देना अब संभव नहीं है. लेकिन मुझे अब उच्च न्यायालय से काफ़ी उम्मीद है."

हालांकि सबरीना को हाईकोर्ट में इस मामले में फिर से शुरू हुई न्यायिक प्रक्रिया से काफ़ी उम्मीद है.

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों इस मामले में सभी अभियुक्तों के बरी होने के बाद जेसिका लाल की हत्या का मामला फिर से सुर्खियों में आया था.

 मुझे यह कहने में ज़रा भी संकोच नहीं है कि जेसिका लाल मामले में पुलिस की ओर से की जा रही जाँच में कमी रही है
 
निखिल कुमार, पूर्व प्रमुख-दिल्ली पुलिस

उधर दिल्ली के पूर्व पुलिस प्रमुख, निखिल कुमार ने कहा कि अपने कामकाज को लेकर पुलिस की जो छवि लोगों के सामने आती है, उसमें पुलिस महकमे के नेतृत्व की मुख्य भूमिका होती है.

उन्होंने कहा, "मुझे यह कहने में ज़रा भी संकोच नहीं है कि जेसिका लाल मामले में पुलिस की ओर से की जा रही जाँच में कमी रही है."

उन्होंने जेसिका लाल मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस को पता था कि यह मामला संवेदनशील है तो पहले से ही गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज क्यों नहीं किए गए?

कितने सुरक्षित?

ऐसी ही आपराधिक घटनाओं में पिछले दिनों एक अंग्रेज़ी पत्रिका के कार्टूनिस्ट, इरफ़ान हुसैन की हत्या के मामले में भी न्याय की प्रक्रिया और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ खड़े हुए हैं.

इरफ़ान मामला
 अगर मेरे भाई की हत्या के मामले में भी कोई दोषी नहीं पाया जाता है तो मैं यह जानना चाहुँगा कि आख़िर मेरे भाई की हत्या किसने की
 
इरफ़ान के भाई

इस बारे में इरफ़ान के भाई ने कहा कि इस घटना के बाद यह साफ़ हो गया है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है और ऐसी घटना किसी के भी साथ हो सकती है.

उन्होंने कहा, "अगर मेरे भाई की हत्या के मामले में भी कोई दोषी नहीं पाया जाता है तो मैं यह जानना चाहुँगा कि आख़िर मेरे भाई की हत्या किसने की?"

 
 
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