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गुरुवार, 06 जुलाई, 2006 को 09:01 GMT तक के समाचार
 
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चार दशक बाद खुला नाथू ला दर्रा
 
नाथू ला
नाथू ला दर्रा पिछले 44 सालों से बंद था
भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध के बाद से बंद नाथू ला दर्रे को व्यापार के लिए खोल दिया गया है.

नाथू ला दर्रा भारत के सिक्किम और चीन के तिब्बत प्रांत को जोड़ता है.

गुरूवार को इस मौके पर नाथू ला दर्रे के पास उत्सव जैसा माहौल था जहां चारों तरफ भारत और चीन के झंडे लहरा रहे थे.

सुबह से ही सैनिक धुनें बज रही थीं और पूरे क्षेत्र को सजा दिया गया था.

भारत और चीन के बीच व्यापारिक समझौते के तहत नाथू ला को खोला गया है.

नाथू ला दर्रे को खोले जाने के बाद क़रीब सौ भारतीय व्यापारी चीनी क्षेत्र में एक व्यापारिक मेले में पहुंचे और इसी तर्ज़ पर चीनी पक्ष से क़रीब सौ व्यापारी भारतीय क्षेत्र में लगाए गए व्यापारिक मेले में आए.

ये दोनों पक्ष एक दूसरे के मेलों में यह अंदाज़ा लगाएंगे कि उनके व्यापार के लिए कितनी जगह है.

समारोह में पहुंचे बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि मौसम ख़राब था लेकिन लोगों में उत्साह की कोई कमी नहीं देखी गई.

सीमा के दोनों पार बज रहे सैनिक बैंड उन दिनों की याद को भुलाने की कोशिश कर रहे थे जो 44 साल पहले गोलीबारी से शुरु हुए थे.

हालांकि अब सैनिकों को भी लगता है कि समय बदल गया है.

भारतीय क्षेत्र के कमांडर ब्रिगेडियर एस एल नरसिम्हन का कहना था, "इस दर्रे का खुलना दोनों देशों के बेहतर होते संबंधों का प्रतीक है. इससे दोनों देशों के द्विपक्षीयो संबंधों में भी सुधार होगा."

सुरक्षा के बारे में पूछे जाने पर नरसिम्हन का कहना था कि यह सुरक्षा विश्वास बढ़ाने का मामला है, दोनों देश इस दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं, रक्षा सहयोग बढ़ रहा है.

भारतीय और चीनी प्रतिनिधियों के लंबे भाषणों के बाद दोनों पक्षों ने नृत्य और संगीत का कार्यक्रम भी पेश किया.

नाथू ला
नाथू ला दर्रा दोनों देशों के बीच सिल्क रुट का हिस्सा रहा है

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने इस अवसर पर चीनी मेहमानों को उपहार भेंट किए.

ग़ौरतलब है कि चामलिंग नाथू ला दर्रे को खोलने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे.

इस अवसर पर चामलिंग ने ल्हासा और गंगटोक के बीच बस सेवा शुरु करने की भी अपील की है.

ऐतिहासिक संबंध

अध्ययनों के अनुसार नाथू ला से 2010 तक 7 करोड़ 50 लाख डॉलर तक के कारोबार की उम्मीद की जा रही है. हालांकि भारत और चीन के बीच होनेवाले व्यापार के लिहाज से यह बहुत छोटी राशि है.

उनका कहना था कि दर्रे पर आठ महीने बर्फ जमी रहती है इसलिए केवल गर्मियों में ही कारोबार संभव हो पाता है.

प्रेक्षकों का कहना है कि नाथू ला से व्यापार की शुरुआत कूटनीतिक दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.

भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने इन विवादों को सुलझाने की दिशा में प्रगति की है.

समझौते के तहत दोनों देश उन 30 वस्तुओं का व्यापार कर सकेंगे जिस पर 1991, 92 और 2003 में सहमति हुई थी.

इन वस्तुओं में कृषि उत्पाद, कंबल, सूखे फल, कॉफी और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ शामिल हैं.

बीसवीं सदी की शुरुआत में भारत और चीन के होनेवाले व्यापार का 80 प्रतिशत हिस्सा नाथू ला दर्रे के ज़रिए ही होता था. यह दर्रा प्राचीन सिल्क रुट का भी हिस्सा रहा है.

 
 
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