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शनिवार, 05 अगस्त, 2006 को 12:21 GMT तक के समाचार
 
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गुजरात और पेरू का संबंध?
 
पहाड़ी
पहाड़ियों पर बनी पंक्तियों के आकार की नालियां नाज़्का लाइन की याद दिलाती हैं
गुजरात के कच्छ ज़िले में भूगर्भशास्त्रियों ने एक पुरातात्विक क्षेत्र खोज निकाला है जो कई मायनों में पेरू के प्राचीन क्षेत्रों में बने डिज़ाइनों से मिलता जुलता है.

यह क्षेत्र एक पहाड़ी है जिसका आकार रोमन लिपि के VI जैसा है. हर पंक्ति में एक नाली खुदी हुई है जो दो मीटर चौड़ी, दो मीटर गहरी और सौ मीटर लंबी है.

पुरातत्वविदों का कहना है कि ऐसे डिज़ाइन पेरू में ही देखे गए हैं.

वड़ोदरा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में भूगर्भ विज्ञान के प्रोफेसर आरवी करंत की अगुआई में पिछले 11 सालों से एक टीम कच्छ क्षेत्र पर शोध कर रही है.

यह टीम कच्छ की पहाड़ियों में बनी मिट्टी और पत्थरों की परतों और भूमि का निरीक्षण कर भूकंप संबंधी जानकारियाँ जुटा रही थीं तब उन्हें यह नई पहाड़ी मिली.

यह पहाड़ी खावडा गांव से तीन किलोमीटर आगे है जिसे कच्छ के रन का गेटवे भी माना जाता है.

मानव निर्मित पहाड़ी ?

कच्छ पहाड़ी
विशेषज्ञों का कहना है कि इन पहड़ियों पर और शोध होना चाहिए

कच्छ का इलाक़ा कई पुरातात्विक महत्व के क्षेत्रों का गढ़ रहा है और इस इलाक़े से 3000 - 1500 ईसा पूर्व में फले फूले हड़प्पा सभ्यता के अवशेष भी मिल चुके हैं.

इसी आधार पर माना जा रहा है कि नई पहाड़ी भी हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी हो सकती है. हालाँकि डॉ करंत का कहना है कि इस बारे में तुरंत कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी.

उनका कहना है कि यह मनुष्य निर्मित पहाड़ी भी हो सकती है. हो सकता है कि यह पहाड़ियों से मिट्टी के कटने के कारण नालियाँ बनीं हों और ये भी हो सकता है कि छोटे भूकंप के कारण ऐसा हुआ हो.

हालाँकि इस पहाड़ी में एक ख़ास बात है कि सभी नालियाँ अलग-अलग दिशाओं में है जो प्राकृतिक रूप से नहीं बन सकती हैं. इसके अलावा सभी नालियों का आकार भी एक जैसा है. चौड़ाई, गहराई और लंबाई भी बराबर है.

उल्लेखनीय है कि पेरु में सन 001 से 700 के बीच नाज़्का सभ्यता के दौरान भी इसी तरह की आकृतियाँ बनाई गई थीं. लेकिन करंत कहते हैं कि नाज़्का सभ्यता में पहाड़ियों पर ऐसे निशान नहीं बने थे.

हालांकि करंत संभावना जताते हैं कि ये निशान अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े हो सकते हैं क्योंकि हड़प्पा सभ्यता में भविष्यवाणियों की प्रथा थी.

 
 
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