BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
सोमवार, 24 सितंबर, 2007 को 12:15 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
अब नहीं सुनाई देती सती की 'जयकार'
 

 
 
सती की एक घटना की तस्वीर
राजस्थान में आज़ादी के बाद सती की 26 घटनाएँ हुई, इनमें रूपकंवर आखिरी थी
राजस्थान के देवराला में सती की घटना को 20 साल पूरे हो गए हैं.

सितंबर, 1987 में वहाँ रूपकंवर को पति की मौत के बाद कथित तौर पर सती प्रथा के नाम पर जिंदा जला दिया गया था.

देवराला में अब बहुत कुछ बदल गया है. अब वहाँ रूप कंवर की बरसी पर चुनरी महोत्सव नहीं होता. सती विरोधी क़ानून के सख्त होने के बाद राजस्थान में सती की कोई घटना नहीं हुई है.

परंपरा के नाम पर वो उन्माद का दौर था, जब सती के गौरव गान के बीच रूपकंवर को अपने पति के शव के साथ अग्नि को समर्पित कर दिया गया था.

इसके विरुद्ध महिला संगठनों के आंदोलन के बाद सती निवारण क़ानून बना तो सती की जयकार अब कहीं सुनाई नहीं देती.

बदलाव

इस बदलाव को देवराला की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रूपकमल शेखावत ने अपनी आँखों से देखा है.

वे कहती हैं, " इन बीस वर्षों में बहुत बदलाव आया है. पहले औरतें घर से नहीं निकलती थी. अब वे नौकरी करने लगी हैं. पहले पर्दा प्रथा का ज़ोर था अब शिक्षा की जागृति आई है."

 वो घटना मेरे काबू में नहीं थी. हमें जेल जाना पड़ा. मुकदमें झेलने पड़े. बहुत कष्ट उठाया. आर्थिक मार पड़ी तो ज़मीन तक बेचनी पड़ी
 
सुमेर सिंह, ससुर, रूपकंवर

दीवराला में उस जगह सन्नाटा पसरा है, जहाँ कभी रूपकंवर को सतीप्रथा की भेंट चढ़ा दिया गया था.

रूप कंवर की बरसी पर पुलिस वहाँ तैनात रहती है, ताकि कोई सती का महिमांडन न कर सके.

गाँव के सरपंच शंकर सिंह कहते हैं, "हमारा गाँव बीती को बिसार चुका है. अब कोई यहाँ सती का गान नहीं करता. लड़कियाँ पढ़ने जाने लगी हैं. महिला अब हर काम में अग्रणी है."

सती का यशोगान करती भीड़ अब नहीं है. देवराला में रूपकंवर के ससुर 70 वर्षीय सुमेर सिंह अब एकाकी जीवन जी रहे हैं. दो बेटों की असमय मौत, पत्नी का निधन और तन्हाई ने उन्हें तोड़कर रख दिया है.

वो अतीत में झाँककर कहते हैं, "वो घटना मेंरे काबू में नहीं थी. हमें जेल जाना पड़ा. मुकदमें झेलने पड़े. बहुत कष्ट उठाया. आर्थिक मार पड़ी तो ज़मीन तक बेचनी पड़ी."

यह पूछने पर कि क्या उन्हें कोई मलाल है, कहने लगे, "वो एक प्राकृतिक वाक़या था. ये कोई पूर्वनियोजित घटना नहीं थी."

आज़ादी के बाद राजस्थान में सती की 26 घटनाएँ हुई, इनमें रूपकंवर आखिरी थी. इनमें से सबसे ज़्यादा सात घटनाएँ अकेले शेखावाटी क्षेत्र में हुईं.

सती विरोधी आंदोलन में अग्रणी रही कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "क़ानून बनने से सती की घटनाओं पर लगाम लगी है. 20 साल में इक्का-दुक्का प्रयास हुए. सती का महिमामंडन भी कम हुआ है."

 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
सती कांड में चार बेटे गिरफ़्तार
21 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
मध्य प्रदेश में एक और महिला 'सती' हुई
20 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
मध्य प्रदेश में एक महिला 'सती' हुई
22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
सूनी कलाइयों पर फिर सजी राखी
28 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
'सती महिमामंडन' मामले में मंत्री तलब
03 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>