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गुरुवार, 04 अक्तूबर, 2007 को 10:45 GMT तक के समाचार
 
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ग़ुलाम नबी के बयान पर विवाद
 
ग़ुलाम नबी आज़ाद
इस आपत्ति पर अभी ग़ुलाम नबी आज़ाद की प्रतिक्रिया नहीं आई है
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि महात्मा गाँधी किसी धर्म से अच्छे आदर्श हैं.

जमायत-ए-इस्लामी और हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के नेताओं ने ग़ुलाम नबी आज़ाद को 'धर्मभ्रष्ट' कहा है.

कुछ स्थानीय अख़बारों ने भी मुख्यमंत्री के बयान का विरोध किया है.

दरअसल दो अक्तूबर, गुरुवार को गाँधी जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा था, "हमने धर्मगुरुओं से और धर्मग्रंथों से जो कुछ सीखा वह परलोक में काम आएगा लेकिन दुनियावी मामलों में, ख़ासकर राजनीति में महात्मा गाँधी से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता."

उनके इस बयान का कड़ा विरोध हो रहा है.

आपत्ति

गुरुवार को उर्दू अख़बार 'इत्तिलात' ने अपने संपादकीय में लिखा है, "मुख्यमंत्री के महात्मा गाँधी के अनुयायी होने पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गाँधीवाद का प्रचार करते हुए वे मुसलमानों की भावनाओं को आहत करें."

वहीं इसका विरोध करने के लिए अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने गुरुवार को एक पत्रवार्ता बुलाई.

 यह कहना कि हज़रत पैग़म्बर के धर्मोपदेश, क़ुरान और इस्लाम परलोक के लिए हैं और इस दुनिया में गाँधी की शिक्षा का पालन करना चाहिए, एकदम ग़ैर इस्लामी है
 
सैयद अली शाह गिलानी

उन्होंने भारतीय जनता के लिए दिए गए योगदान के लिए महात्मा गाँधी की तारीफ़ की. लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री के इस बयान का विरोध किया कि इस्लामी धर्मोपदेश इस दुनिया के लिए नहीं हैं.

उन्होंने कहा, "यह कहना कि हज़रत पैग़म्बर के धर्मोपदेश, क़ुरान और इस्लाम परलोक के लिए हैं और इस दुनिया में गाँधी की शिक्षा का पालन करना चाहिए, एकदम ग़ैर इस्लामी है."

ग़ुलाम नबी आज़ाद की तुलना लेखक सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन से करते हुए कहा, "इस तरह के बयान केवल वही लोग दे सकते हैं जो लोग धर्मभ्रष्ट हैं. यह सोच सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन की सोच जैसी है."

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने यह विवादास्पद बयान गाँधी जयंती पर आयोजित एक वादविवाद प्रतियोगिता में पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर दिया.

स्कूली बच्चों की यह प्रतियोगिता गाँधी के अहिंसा के दर्शन विषय पर आयोजित था और यह पाँच हफ़्तों तक चलता रहा.

इस प्रतियोगिता पर टिप्पणी करते हुए एक अख़बार कश्मीर-ए-उज़मा ने लिखा, "गाँधी का यह दर्शन राजनीतिज्ञों और अफ़सरों को सिखाना चाहिए जो हर रोज़ इसका उल्लंघन करते हैं."

अख़बार का कहना था, "सरकार ने इसके बदले बच्चों की पढ़ाई ख़राब करके उनका मूल्यवान समय ख़राब किया."

 
 
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