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रविवार, 06 जनवरी, 2008 को 04:37 GMT तक के समाचार
 
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'हिंसा में ईसाई भी शामिल थे'
 
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उड़ीसा में पहले भी ईसाई समुदाय के लोगों पर हमले हो चुके हैं
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में पिछले दिनों हुई हिंसा मामले में पहली बार ईसाई नेताओं ने माना है कि इसमें ईसाई लोग भी शामिल थे.

कंधमाल ज़िले में पिछले हफ्ते हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का तीन सदस्यीय दल प्रभावित इलाक़ों का दौरा करेगा और स्थिति की समीक्षा करेगा.

पिछले हफ्ते 25 दिसंबर को विश्व हिंदू परिषद के बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद 27 दिसंबर को ब्राह्मणीगांव में की हथियारबंद लोगों ने हमला किया था और अब ईसाई नेताओं का कहना है कि इसमें ईसाई लोग शामिल थे.

भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत में कटक-भुवनेश्वर के आर्चबिशप रेव राफेल चेन्नाथ ने माना कि ब्राह्णणीगांव पर हुए हमले में ईसाई शामिल थे जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और करीब 70 घर जला दिए गए थे.

उनका कहना था ' हम इस हिंसा की निंदा करते हैं, किसी भी प्रकार का भड़कावे में आकर हिंसा करना ग़लत है. ईसाईयों को कभी हिंसा नहीं करनी चाहिए.'

ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के महासचिव जॉन दयाल ने भी हिंसा की निंदा की. दयाल ने 20 पृष्ठों की एक रिपोर्ट भी जारी की जिसमें कंधामल में हुई हिंसा के लिए पूर्ण रुप से राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया गया.

अब जहां एक तरफ ईसाई नेता मान रहे हैं कि 27 दिसंबर को हुए हमले में ईसाई लोग शामिल थे वहीं दूसरी ओर उड़ीसा की पुलिस पहले की कह चुकी है कि इस हमले में माओवादियों का भी हाथ था.

अल्पसंख्यक आयोग का दौरा

सोमवार को उड़ीसा के मुख्य सचिव अजीत त्रिपाठी और गृहसचिव तरुण कांति मिश्र आयोग के सदस्यों से मिलेंगे और अपनी सूचनाओं से उन्हें अवगत करवाएँगे.

मंगलवार को आयोग के सदस्य कंधमाल में ब्राह्मणी गाँव के दौरे पर जाएँगे और वहाँ जाकर सांप्रदायिक दंगों के पीड़ित लोगों से और चर्च के सदस्यों से मिलेंगे.

अल्पसंख्यक आयोग लौटकर एक बार फिर राज्य सरकार के अधिकारियों से चर्चा करेगा और फिर लौटकर दिल्ली में केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा.

उल्लेखनीय है कि गत 25 दिसंबर को क्रिसमस के मौक़े पर कई चर्चों पर हमले किए गए थे.

कंधमाल ज़िले में ब्राह्मणी गाँव सहित कई गाँवों में लोगों पर भी हमले किए गए थे और ईसाई समुदाय के लोगों के घर जला दिए थे.

बाद में यह सांप्रदायिक दंगों में बदल गया था और वहाँ कई दिनों तक कर्फ़्यू लगाना पड़ा था.

 
 
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