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सोमवार, 24 मार्च, 2008 को 09:59 GMT तक के समाचार
 
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शिवानी हत्याकांड में शर्मा को उम्रक़ैद
 
शिवानी भटनागर
शिवानी भटनागर की हत्या के नौ साल बाद फ़ैसला आया है
दिल्ली की एक अदालत ने पत्रकार शिवानी भटनागर हत्याकांड में पूर्व आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा सहित चार लोगों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

आरके शर्मा को 20 हज़ार रुपए का जुर्माना अदा करने को भी कहा गया है जबकि शेष तीन अभियुक्तों पर दस-दस हज़ार रुपयों का जुर्माना लगाया गया है.

सरकारी वकील ने इस मामले के प्रमुख अभियुक्तों आरके शर्मा और प्रदीप शर्मा को मौत की सज़ा देने की मांग की थी लेकिन अदालत ने इसे यह कहकर स्वीकार नहीं किया कि आरके शर्मा की पृष्ठभूमि आपराधिक व्यक्ति की नहीं रही है.

पिछले मंगलवार को अदालत ने आरके शर्मा और तीन अन्य लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया था.

इस मामले के दो अन्य अभियुक्तों वेद प्रकाश शर्मा और वेद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था.

बचाव पक्ष की वकील मनीषा शर्मा ने इस फ़ैसले के बाद कहा है कि पूरा फ़ैसला पढ़ने के बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में अपील की जाए या नहीं.

हत्या

दिल्ली के अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' में काम करने वाली पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को उनके पूर्वी दिल्ली स्थित अपार्टमेंट में हत्या कर दी गई थी.

क़रीब नौ साल बाद अदालत ने 18 मार्च को अपना फ़ैसला सुनाया.

अपने 100 पन्ने के फ़ैसले में जज राजेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आरके शर्मा ने अन्य अभियुक्तों के साथ शिवानी भटनागर को मारने की साज़िश की थी.

इस मुक़दमे के दौरान 209 में से 51 गवाह मुकर गए थे. इसके बावजूद सरकारी पक्ष ने शिवानी भटनागर हत्याकांड की कड़ियाँ जोड़ने में सफलता पाई.

अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि शिवानी भटनागर पहली बार आरके शर्मा से तब मिली थीं जब शर्मा प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के कार्यालय में विशेषाधिकारी थे.

अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार बाद में शिवानी भटनागर और आरके शर्मा के बीच प्रेम संबंध बन गए और उसी दौरान शर्मा ने शिवानी को कुछ गोपनीय दस्तावेज़ दिखाए जिनमें सेंट किट्स मामले से संबंधित भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ थे.

मामला

अभियोजन पक्ष के मुताबिक़ आरके शर्मा ने शिवानी भटनागर से विवाह करने से इनकार कर दिया तो शिवानी भटनागर ने कथित तौर पर आरके शर्मा का भंडाफोड़ करने की धमकी दी. अदालत को बताया गया कि उसके बाद शर्मा ने शिवानी की हत्या करने का फ़ैसला कर लिया.

शिवानी भटनागर अपने मकान में अपने बेटे के साथ रहती थी जब उसकी हत्या की गई. आरोप थे कि हत्यारों ने बिजली के एक तार से शिवानी भटनागर का गला घोंट दिया और किचन में इस्तेमाल होने वाले चाकू से उस पर कम से कम दस वार किए.

लगभग तीन साल तक शिवानी भटनागर के हत्याकांड मामले की जाँच में कोई प्रगति नहीं हुई थी लेकिन मुक़दमे के दौरान एक स्तर पर शक के तार आरके शर्मा की तरफ़ मुड़े और शिवानी भटनागर को रास्ते से हटाने की साज़िश का भंडाफोड़ हुआ.

शर्मा ने कई महीनों तक फरार रहने के बाद आख़िरकार अगस्त 2002 में अंबाला की एक अदालत में आत्मसमर्पण किया था. गिरफ़्तारी के समय वे पुलिस महानिरीक्षक (कारावास) थे.

पुलिस ने बाद में श्रीभगवान को भी गिरफ़्तार कर लिया था. पुलिस ने दावा किया था कि आरके शर्मा ने सहअभियुक्त सत्यप्रकाश, श्रीभगवान, वेद प्रकाश शर्मा और वेद उर्फ़ कालू से दिसंबर 1998 में दिल्ली के अशोक होटल में मुलाक़ात की थी.

 
 
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